कन्याओं की पूजा क्यूँ है खास, जाने सनातन धर्म में नवरात्रों का महत्व

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नवरात्र के आठवें दिन यानी अष्टमी को महागौरी की पूजा होती हैं  नवरात्र का यह दिन अपने आप में खास है वैसे तो नवरात्र के हर दिन कन्याओं की पूजा का विधान हैं लेकिन अष्टमी को औरतें अपने सुहाग के लिए मां को चुनरी अर्पित करती हैं।  महागौरी को आदि शक्ति माना जाता है [ads1]देवी गौरी की पूजा भी उसी तरह होती है, जिस तरह से सप्तमी तिथि तक मां की पूजा हुई, महागौरी ने तप करके गौर वर्ण हासिल किया था, इन्हें अन्नपूर्णा देवी भी कहा जाता है, ऐसा माना जाता है कि चैत्र शुक्ल प्रतिपदा की नवरात्र की अष्टमी तिथि को इनकी पूजा करने से सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं[ads1]अष्टमी वाले दिन देवी महागौरी की प्रतिमा को श़ुद्ध जल से स्नान करवाकर वस्त्र, आभूषण आदि से पूरा श्रृंगार करें। इसके बाद विधि पूर्वक आराधना की जाती है। हवन करते समय उसकी अग्नि में धूप, कपूर, घी और हवन सामग्री की आहुति दें। वैसे हवन में सिंदुर में एक जायफल लपेटकर उसकी आहुति देने का विधान है[ads1]मां की पूजा करने के बाद इनकी जय बोलते हुए 101 परिक्रमा करें अधिकतर जगह इन दिन कन्याओं को भोजन भी करवाया जाता है।
इन्हीं का एक अंश है कौशिकी
कहा जाता है कि शुंभ निशुंभ से पराजित होकर देवताओं ने गंगा के तट पर महागौरी की पूजा की थी और मां गौरी के अंश से ही शुंभ निशुंभ का अंत करने वाली कौशिकी का जन्म हुआ था।
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