आजाद भारत में रात्रि को संसद का सत्र क्यूँ ,क्यों यह दिन में नहीं हो सकता क्या ?

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 आजाद भारत में आखिर मध्य रात्रि को संसद का सत्र क्योँ  क्या यह सत्र दिन में नहीं हो सकता था .रात्रि का समय तो वैसे भी किसी अच्छे काम के लिए नहीं माना जाता फिर ये सत्र रात मे क्यूँ ? क्या है इसके पीछे का सच जानते हैं –

भारत में समय समय पर ऐसे सवाल आजादी मिलने से लेकर और आज भी देखने को मिल ही जाते हैं जो समझ से परे होते है जैसे आप सबको पता है कि भारत को जब आजादी मिली थी तो वह भी मध्य रात्रि को ही दी गयी थी जिसको आज तक भारत के नागरिक समझ नहीं पाए है .

हमारे देश में एक और ऐसी विडम्बना थी की आजादी मिलने के लगभग 50 साल तक बजट को शाम को 5 बजे प्रस्तुत किया जाता था जिसे बाद में 1997 से बदला गया.

रात्रि को संसद का सत्र करने का कारन हमें जो लगता है वो यह है की विदेशों में लोग इसे देख सके क्यूंकि तब वह दिन होगा.

वस्तु एवं सेवा कर यानी जीएसटी आज रात (शुक्रवार) संसद का विशेष सत्र बुलाकर लॉन्च किया जाएगा. आजाद भारत के इतिहास में यह चौथा मौका होगा जब संसद के सेंट्रल हॉल में मिडनाइट सेशन लगेगा. यह समारोह रात 11 बजे शुरू होगा. राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी और पीएम नरेंद्र मोदी का भाषण होगा. ठीक 12 बजे घंटी बजने के साथ ही GST लागू हो जाएगा. इसके लिए संसद को दुल्हन की तरह सजाया जा रहा है. इससे पहले 1997 में आजादी की स्वर्ण जयंती के मौके पर संसद का विशेष सत्र बुलाया गया था. यह कार्यक्रम 15 अगस्त 1947 की मध्यरात्रि की याद दिलाने वाला होगा, जब भारत अपने भविष्य की राह पर आगे निकला था.

इससे पहले तीन बार आधी रात को सेंट्रल हॉल में संसद चली है?

14 अगस्त 1947 में सेंट्रल हॉल को कॉन्स्टिट्यूशन हॉल कहा जाता था. देश को आजादी मिलने जा रही थी. आधी रात को विशेष सत्र बुलाया गया. पहले राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद आए और सबसे पहले वंदे मातरम गाया गया. इसके बाद राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री (जवाहर लाल नेहरू) ने स्पीच दी.

  1. 14 अगस्त 1972 को आजादी मिलने के 25 साल पूरे होने के मौके पर भी संसद का आधी रात्रि को सत्र बुलाया गया. तब वीवी गिरी राष्ट्रपति थे. इंदिरा गांधी प्रधानमंत्री थीं.
  2. 14 अगस्त 1997 को आजादी की 50वीं सालगिरह के मौके पर आधी रात को विशेष सत्र बुलाया गया. उस समय इंद्र कुमार गुजराल पीएम थे और केआर नारायणन राष्ट्रपति थे.

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