क्या बजह है कि दिल्ली में CM केजरीवाल की खाँसी बढ़ रही है

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नई दिल्ली: प्रदूषण के चलते देश की राजधानी दिल्ली और आसपास के इलाके की हालत बेहद चिंताजनक हो गई है. आलम यह है बच्चे घरों में कैद हो गए हैं तो बड़े डरते हुए सड़कों पर निकलने को मजबूर हैं. दिल्ली को इस हालत में पहुंचाने में यहां रह रहे लोग भी जिम्मेदार हैं, लेकिन जनता को इस मुश्किल से बचाने के लिए राज्य सरकार को भी कोशिशें करनी चाहिए थी. सीएम अरविंद केजरीवाल की अगुवाई वाली मौजूदा सरकार ने करीब तीन साल का कार्यकाल पूरा कर लिया है. ऐसे में हम आपका ध्यान मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के उन पांच वादों की ओर दिलाना चाहते हैं, जिन्हें अगर उनकी सरकार ने पूरा किया होता तो शायद दिल्ली में प्रदूषण का स्तर इतना नहीं बढ़ता.

1. मशीन से साफ की जाएंगी सड़कें: मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने वादा किया था कि मैकेनिकल रोड स्वीपर मशीन के जरिए हर रोज दिल्ली की सड़कों से धूल हटाए जाएंगे. NDMC एरिया में प्रयोग के तौर पर इस तरह की पहली मशीन का इस्तेमाल किया गया था. बाद में पीडब्लूडी के तहत आने वाली 1260 किलोमीटर लंबी सड़कों की सफाई के लिए भी इसी तरह की मशीनों का इस्तेमाल किया जाएगा. इन मशीनों की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इनसे सड़कों की सफाई करते वक्त धूल कम उड़ती है और उससे प्रदूषण कम होता है. इन मशीनों से रात के वक्त सड़कों की सफाई की जाएगी और ये मशीनें रोज 5 से 10 किमी की वर्किंग स्पीड से करीब 30 किमी एरिया में सफाई कर सकेंगी. सीएम का यह वादा अब तक पूरा नहीं हुआ है.

2. 10 साल पुराने डीजल वाहन हटाए जाएंगे: एनजीटी और दिल्ली हाई कोर्ट ने आदेश दिया था कि दिल्ली सरकार तत्काल प्रभाव से 10 साल पुरानी डीजल गाड़ियों को बैन करे. केजरीवाल सरकार ने वादा किया था कि वे इस आदेश को तत्परता से लागू करेंगे. मौजूदा समय में दिल्ली में बड़े पैमाने पर 10 साल पुरानी डीजल गाड़ियां चलती हैं.

3. एयर प्यूरीफायर लगाए जाएंगे: सीएम केजरीवाल ने वादा किया था कि दिल्ली के भीड़-भाड़ वाले इलाकों मं एयर प्यूरीफायर लगाए जाएंगे. इसके लिए दिल्ली सरकार ने जगहों को चिन्हित भी कर लिया था, लेकिन इस वादे को भी अभी तक पूरा नहीं किया गया है.

4. हेलीकॉप्टर से पानी बरसाए जाएंगे: दिल्ली में प्रदूषण की बड़ी वजह हरियाणा और पंजाब में बड़े पैमाने पर खेतों में फसलों के अवशेष को जलाया जाना भी है. वहां से उठने वाला धुंआ दिल्ली की सघन आबादी वाले इलाकों के ऊपर आकर जमा हो जाते हैं. इस समस्या से निदान के लिए सीएम केजरीवाल ने एक्सपर्ट्स की सलाह पर वादा किया था कि वे हेलीकॉप्टर की मदद से दिल्ली के उन इलाकों में कृत्रिम बारिश कराई जाएगी, जहां धुंआ का असर ज्यादा होगा.

5. ऑड-ईवन जैसे फैसले नियमित अंतराल पर लागू किए जाएंगे: सीएम केजरीवाल ने कहा था कि दिल्ली में प्रदूषण का स्तर बढ़ने पर नियमित रूप से ऑड-ईवन जैसे प्रयोग किए जाएंगे. केजरीवाल सरकार ने इस प्रयोग को दोबारा लागू नहीं कर पाई है. या इससे मिलती-जुलते फैसले भी नहीं ले रही है.

6. कूड़े-कचरे का प्रबंधन किया जाएगा: दिल्ली के ज्यादातर इलाकों में कूड़ा बड़ी समस्या है. जिन इलाकों से नियमित रूप से कूड़े उठाए भी जाते हैं, वहां भी प्रदूषण की समस्या है. दरअसल, एकत्र किए गए कूड़े को गाजीपुर, भलसवा, ओखला में डंप किया जाता है. इन तीनों जगहों पर कूड़े का इतना बड़ा ढेर जमा हो गया है कि यहां से उड़ने वाले धूल-कण हवा में तैरते रहते हैं. सीएम केजरीवाल ने दिल्ली हाईकोर्ट को आश्वासन दिया था कि वे कूड़ा प्रबंधन की ऐसी तकनीक अपनाएंगे, जिससे दिल्ली में इस वजह से प्रदूषण नहीं होंगे. दिल्ली सरकार ने तीन साल के कार्यकाल में इस विषय पर भी कोई फैसला नहीं लिया है.

7.  पब्लिक ट्रांसपोर्ट यूज करने को मजबूर होंगे लोग: ऑड-ईवन लागू करने के दौरान सीएम केजरीवाल ने वादा किया था कि वे दिल्ली में पब्लिक ट्रांसपोर्ट की स्थिति इतनी बेहतर कर देंगे की लोग निजी गाड़ियों का इस्तेमाल लगभग बंद कर देंगे. इस ओर भी दिल्ली सरकार ने तीन साल में कोई कदम नहीं उठाए हैं.

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