ऐसा क्या किया राज्य सरकार ने कि उत्तराखंड के ग्रामप्रधानों ने छोड़ी सदस्यता

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राज्य सरकार द्वारा ग्राम पंचायतों को मिलने वाले बजट में कटौती के विरोध में सोमवार को जिले के प्रधानों ने जिला पंचायत राज अधिकारी को सामूहिक इस्तीफे दिए। उन्होंने संबंधित मुहर भी जमा करा दीं। इस दौरान प्रधानों ने सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी भी की। चेतावनी दी कि जब तक सरकार द्वारा बजट कटौती का निर्णय वापस नहीं लिया जाता, प्रधानों का विरोध जारी रहेगा और वह अपना कार्य नहीं करेंगे। प्रधानों ने राज्य वित्त के तहत ग्राम पंचायतों को आवंटित होने वाली धनराशि में की गई 65 फीसदी कटौती को निरस्त करने, पंचायत राज्य एक्ट-2016 को लागू करने व प्रधानों का मानदेय पांच हजार करने की मांग की है। कहा कि प्रधानों की मागों को सरकार द्वारा अनदेखा किया जा रहा है। बजट में कटौती से गांवों का विकास बाधित होगा, जिसे प्रधान बर्दाश्त नहीं करेंगे। इसके पश्चात जिले के 511 प्रधानों ने डीपीआरओ अतुल प्रताप सिंह को सामूहिक त्याग पत्र देकर मुहर जमा करवा दीं। इस मौके पर प्रधान संगठन के जिलाध्यक्ष कुंदन सिंह बोहरा, उपाध्यक्ष कुंदन सिंह मेहता, भीमताल ब्लॉक अध्यक्ष हिमांशु पांडे, कुंदन देउपा, संजय जोशी, आनंद कुजरवाल, मदन मोहन तिवारी, मुन्नी चौहान, प्रेमा देवी, किरन कुमार भट्ट समेत जिलेभर के कई प्रधान मौजूद थे। जिलाध्यक्ष कुंदन सिंह ने कहा कि जिले में 511 प्रधान हैं। सभी ने सामूहिक इस्तीफा दिया है, जो प्रधान बारिश, मार्ग अवरुद्ध होने अथवा अन्य कारणों के चलते यहां नहीं आ पाए, वे बीडीओ के माध्यम से अपना इस्तीफा भेजेंगे।

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