पैदल चलकर अपने गांव पहुंचे सेना प्रमुख, गांव में घर बनाने की जताई इच्छा

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    कोटद्वार: सेना प्रमुख बिपिन रावत सपत्नीक अपने गांव पैतृक पहुंचे तो लोग खुशी से झूम उठे। स्वयं जनरल रावत की भावुक आंखें भी उनके गांव पहुंचने की खुशी को बयां कर रही थी। उन्होंने परिजनों से गांव की समस्याओं पर चर्चा की और मौके पर मौजूद एसडीएम राकेश तिवारी से गांव तक सड़क न पहुंचने के कारणों की जानकारी ली।

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    परिजनों से बातचीत में उन्होंने गांव में घर बनाने की इच्छा जताई तो चाचाओं ने उन्हें गांव में जमीन भी दिखायी। जनरल ने चाचा भरत सिंह के आवास के समीप ही एक खेत में आवास बनाने की बात कही।

    जनरल रावत व उनकी पत्नी मधुलिका रावत हेलीकॉप्टर से लैंसडौन पहुंचे। वहां दोपहर का भोजन करने के बाद वे करीब सवा तीन बजे कार से ग्राम बिरमोली पहुंचे। यहां से अपने गांव सैणा तक एक किमी की दूरी उन्होंने पैदल तय की।

    सैणा गांव पौड़ी जिले के द्वारीखाल विकासखंड में पड़ता है। गांव में चाचा भरत सिंह रावत व हरिनंदन ङ्क्षसह रावत ने जनरल रावत का स्वागत किया। जनरल रावत ने परिजनों से गांव में खेती की जानकारी ली और समस्याओं पर भी विस्तृत चर्चा की।

    उनके चाचा भरत सिंह व हरिनंदन ङ्क्षसह ने बताया कि जंगली जानवर फसलों को नष्ट कर देते हैं, जिससे लोगों ने खेती करनी छोड़ दी है। यही नहीं, धीरे-धीरे लोग गांव से भी रुखसत हो रहे हैं। इस पर जनरल रावत ने कहा कि पर्वतीय क्षेत्रों से पलायन रोकने के लिए रोजगार देने वाली योजनाओं को गांवों में लाना होगा।

    गांव में करीब दो घंटे का वक्त गुजारने के बाद जनरल रावत रात्रि विश्राम के लिए लैंसडौन लौट गए। गांव से लौटते हुए जब जनरल रावत पत्नी मधुलिका के साथ सड़क में पहुंचे तो वहां बड़ी संख्या में महिलाएं मौजूद थीं। उन्होंने सभी का हालचाल पूछा और दोबारा गांव आने का भरोसा दिलाया।

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