संकट में गांव और ख़त्म होती पारंपरिक फसलें, परेशानी में किसान

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चमोली: ग्राम सेलंग में लहलहाती पारंपरिक फसल “ओगल और फाफर” जिसका बुवाई दायरा सिमटता जा रहा है। आज से दस वर्ष पूर्व गांव के हर छोटे-बड़े किसान ओगल और फाफर की बुवाई करते थे और फसल का खूब उत्पादन होता था!आज गांव के गिने चुने खेत मालिक ही इस फसल की अपने खेतों में बुवाई कर रहे है। फसल उगाई के लिहाज से ओगल और फाफर सरल और सहज है इस फसल को अगस्त के मध्य में आलू के साथ मिश्रित फसल के रूप में उगाई जाती है तथा गुड़ाई-निराई भी इस फसल के लिए अन्य फसल की तुलना में नहीं करनी पड़ती है! औषधीय गुणों से प्रचुर ओगल और फाफर के आटे से रोटी बनायीं जाती है..लगातार जोत भूमि का घटना जंगली भालू का इस फसल को भारी नुकसान पहुंचाया जाना आज “ओगल और फाफर” की फसल संकटग्रस्त हो गयी है…धीरे-धीरे खतों से ये फसल ख़त्म होती जा रही है जो कि पहाड़ी जीवन और ग्रामीण के लिए घोर संकट है.

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