Video: उत्तराखंड : 12 साल की उम्र में ही शुभम ने रचा इतिहास

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कहते हैं कि काबिलियत कभी किसी पहचान का मोहताज नहीं होती। काबिल बनिए, इससे कामयाबी आपके पीछे दौड़ी चली आएगी। इस बात को साबित किया है उत्तराखंड के पहाड़ों में रहने वाले एक बच्चे शुभम काला ने। हैरानी की बात तो ये है कि इस बच्चे के पिता चाय के जरिए घर का खर्चा चलाते हैं। अब आप ये भी जान लीजिए कि इस छोटे से बचचे ने क्या कारनामा किया है। 12 साल के बच्चे शुभम ने बांध का एक जबरदस्त मॉडल पेश किया है। यकीन मानिए जिस बांध का मॉडल बनाते बनाते बड़े बड़े वैज्ञानिकों के पसीने छूट जाते हैं, वो मॉडल बनाना शुभम के लिए अब बाएं हाथ का खेल हो गया है। जिस उम्र में बच्चे खेल खिलौनों से खुद को अलग नहीं कर पाते, उस उम्र में विज्ञान शुभम के लिए खेल बन गया है। रुद्रप्रयाग जिले के गुलाबराय में रहने वाले शुभम के इस प्रोजक्ट की जमकर तारीफ हो रही है।आपको यकीन नहीं होता तो ये वीडियो जरूर देखिए। हर उम्मीद पर एकदम खरा उतरते हुए शुभम ने साबित कर दिया है कि प्रतिभाएं पहाड़ों से निकलकर ही देश विदेश में अपनी पहचान बनाती हैं। 12 साल के बच्चे शुभम ने किताब को अपना गुरु माना और इसके आधार पर ही विद्युत उत्पादन के लिए बांध जैसे बड़े प्रोजेक्ट का नमूना तैयार किया है। प्लास्टिक की बाल्टी में शुभम ने पानी स्टोर किया। इसके बाद थर्माकोल की नहर तैयार की। पानी की ये धार छोटी सी टरबाइन पर जाती है। इससे मोटर घूमने लगती है और बिजली पैदा हो रही है। इसके साथ ही शुभम ने इस प्रोजक्ट में नेशनल हाईवे का भी मैप बनाया है। शुभम काला ने सबसे पहले अपने इस प्रोजक्ट को अपने टीचर्स को दिखाया। शिक्षकों ने जब ये प्रोजक्ट देखा तो खुद हैरान रह गए। शुभम जैसे होनहारों की प्रतिभा को एक बड़े मंच की दरकार है।शुभम की मां घरेलू कामकाजों में व्यस्त रहती हैं तो पिता चाय की दुकान चलाकर घर का खर्चा निकालते हैं। एक तरफ बिजली उत्पादन के लिए सरकार करोड़ों-अरबों रुपये खर्च कर रही है, तो दूसरी तरफ कम संसाधनों में ही 12 साल के बच्चे ने ऐसा मॉडल तैयार किया कि हर कोई हैरान रह गया। शुभम खुद चाहते हैं कि आगे चलकर वो देश के एक बड़े वैज्ञानिक बनें। राज्य समीक्षा की टीम की तरफ से इस होनहार बच्चे को हार्दिक शुभकामनाएं। आगे बढ़िए और जिंदगी में अपना नाम रोशन कीजिए।

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