उत्तराखंड की संस्कृति की सप्तरंगी छटा दिखी ईगास पर्व में

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देहरादून: ग्यारह गांव एवं हिंदाव सामाजिक सांस्कृतिक विकास समिति की ओर से माता मंदिर रोड (अजबपुर) स्थित सौढ़ी मैदान में इगास पर्व उल्लास और पारंपरिक रूप से मनाया गया। इस दौरान देवभूमि की निराली और अद्भुत संस्कृति की ऐसी सप्तरंगी छटा बिखरी कि हर कोई इसमें रंग गया। ढोल-दमाऊ, मसक बाजा, तूरी, रणसिंघा आदि लोक वाद्य यंत्रों का वादन माहौल को और उल्लासित कर रहा था। लोग लोक के रंगों से सराबोर होकर झूम रहे थे। महिलाएं पारंपरिक वेशभूषा में ‘झुमैलो’ नृत्य कर रही थीं। साथ ही, लोगों ने इगास पर होने वाला भैलो नृत्य भी किया। चीड़ व देवदार के छिलकों से भैलो बनाया जाता है और पूजा-अर्चना के बाद लोग इसे घुमाते हुए नृत्य करते हैं। इस कार्यक्रम का उद्देश्य लोक संस्कृति का संरक्षण और इससे जनमानस को रूबरू कराना था। 

इगास कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि रायपुर विधायक उमेश शर्मा काऊ, भाजपा प्रदेश सचिव सुनील उनियाल गामा, पार्षद सोनू उनियाल ने दीप जलाकर किया। इसके बाद सुरेश शिवराज एवं साथियों ने लोक वाद्य यंत्रों के साथ ‘मंडाण’, ‘पांडव’ और ‘केदार’ नृत्य की प्रस्तुति दी। फिर, रामेश्वर प्रसाद सुरीरा और बबली कोठियाल ने ‘जेजे बदरीनाथ जी’ पर झुमैलो नृत्य किया। इसके बाद महिलाओं ने नृत्य की प्रस्तुति देकर लोक के रंग बिखेरे। सुरेश शिवराज एवं साथियों ने ‘चांद सूरज कन कैक होण मिलन जूं न्यालि’ और एसपी डंगवाल ने ‘गढ़ स्तुति’ की प्रस्तुति दी।

इस मौके पर समिति के अध्यक्ष एसपी डंगवाल, वरिष्ठ उपाध्यक्ष कैलाश राम तिवारी, महामंत्री शूरवीर लाल, गुरुप्रसाद उनियाल, किशन सिंह नेगी, विनोद नौटियाल, जमुना प्रसाद, गुमान सिंह, यूएस रावत, विनोद नौटियाल आदि मौजूद रहे।

पारपंरिक पकवानों का लिया स्वाद 

इगास पर बनने वाले पकवानों से भी पूरा वातावरण महकता रहा। लोगों ने दाल की पकौड़ी, दाल-भात और अन्य व्यंजनों का खूब लुत्फ उठाया। समिति के अध्यक्ष एसपी डंगवाल ने बताया कि ग्यारह एवं हिंदाव (दो पट्टी) के करीब 300 परिवार देहरादून में रहते हैं। 80 के दशक में पलायन शुरू हुआ था। गांव के रीति-रिवाज लुप्त होने की कगार पर हैं। आने वाली पीढ़ी अपनी संस्कृति को जाने और आगे बढ़ाए। इसी उद्देश्य से समिति का गठन किया गया।

दीपावली के 11 दिन बाद गढ़वाल में इसे मनाया जाता है। इसे इगास बग्वाल यानी दीपावली कहा जाता है। प्रचलित कथा के अनुसार गढ़वाल में प्रभु राम के अयोध्या लौटने की सूचना 11 दिन बाद मिली थी। इसके बाद खुशी में लोगों ने भैलो खेला था।

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