25 साल की उम्र में उत्तराखंड का लाल, देश के लिए कुर्बान

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अपनी जान पर खेलते हुए उत्तराखंड का लाल देश के लिए शहीद हो गया। उसने मुस्कुराते हुए अपनी जिंदगी के दो पल ख़ुशी से भी नहीं बिताये थे। वो अपने 4 बहिनों के बीच में एकलौता भाई थे। जम्बू कश्मीर के पांपोर के सांबूरा गांव में आतंकियों से मुठभेड़ के दौरान गढ़वाल राइफल के जवान सूरज सिंह तोपाल शहीद हो गए।

वो घर के एकमात्र चिराग थे। वो एक वीर सिपाई थे क्योंकि उनके पिता नारायण सिंह तोपाल भी भूतपूर्व सैनिक थे। तो देशभक्ति बचपन से ही उनमे कूट कूट कर भरी थी। 3 सितंबर, 1992 को जन्मे सूरज के पिता ही चाहते थे कि उनका बेटा भी फौज में जाए।

बेटे की शहादत की खबर के बाद नारायण सिंह कहते हैं कि उन्हें अपने बेटे की शहादत पर उन्हें गर्व है। सूरज सिंह तोपाल उत्तराखण्ड के चमोली जिले के रहने वाले थे। उनका गांव कर्णप्रयाग क्षेत्र में कोलाडूंग्री का फलोट हैं।

शुक्रवार शाम को शहीद का शव जॉलीग्रांट एअरपोर्ट पहुंचा यहां से शहीद का पार्थिव शरीर उनके गांव के लिए रवाना किया गया है। शहीद का शनिवार को राजकीय सम्मान के साथ उनके पत्रिक घाट पर अंतिम संस्कार किया जाएगा।

पूरा उत्तराखंड उन्हें आज नमन कर रहा है क्योंकि वो बहादुरी से आतंकियों से लड़ते हुए शहीद हुए। सीने में गोली खाकर देश लिए शहीद होना सबसे बड़ी सहादत मानी जाती है। बहनों के इकलौते भाई सूरज की शहादत की ख़बर सुनकर परिवार में मातम छाया है।

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