उत्तराखंड: गोल्फा गांव के गर्भ में छिपा है प्रकृति का सबसे बड़ा रहस्य

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मुनस्यारी के सीमावर्ती गोल्फा गांव के गर्भ में प्रकृति का सबसे बड़ा रहस्य छुपा हुआ है। प्राकृतिक संसाधानों से भरा 200 परिवारों का यह गांव करीब 1000 साल पहले प्राकृतिक कहर का शिकार हो गया था। इस गांव के गर्भ में सिंधु घाटी की सभ्यता की तरह एक बड़े प्राचीन गांव की सभ्यता के अवशेष मिले हैं।

गोल्फा गांव का अध्ययन कर लौटे कुमाऊं विश्वविद्यालय में गांधी अध्ययन केन्द्र के निदेशक प्रो.गिरधर सिंह नेगी ने यह रिपोर्ट हिन्दुस्तान से शेयर की है। प्रो. नेगी ने बताया कि गोल्फा गांव पिथौरागढ़ जिला मुख्यालय से 130 किलोमीटर की दूरी पर मुनस्यारी के सेराघाट क्षेत्र में स्थित है। गोल्फा गांव के गर्भ में गोरी नदी घाटी के सबसे सीमांत और प्राकृतिक संसाधनों से भरे गांव के अवशेष मिले हैं। गोल्फा गांव के गर्भ में प्राकृतिक कहर के चलते 200 परिवारों का गांव पूरी तरह से जमींदोज हो गया था। जिसके ऊपर बने टीले में वर्तमान में गोल्फा गांव बसा हुआ है। जिसमें एक प्राचीन सभ्यता के पूरे रहस्य छुपे हुए हैं। 9000 फिट की ऊंची चोटी में बसे गोल्फा गांव में प्राचीनतम तालाब होने के प्रमाण भी मौजूद हैं। पूरी तरह से सूख चुका यह तालाब गांव को जीवन देता था। अब हालत यह है कि तीन माह तक बर्फ पड़ने के बावजूद इस तालाब में कीचड़ तक मौजूद नहीं रहती है।

पुरातात्विक अध्ययन से चलेगा प्राचीन सभ्यता का पता
प्रोफेसर गिरधर सिंह नेगी कहते हैं कि पूरे क्षेत्र में एक माह तक रहकर उन्होंने गांव में मौजूद तमाम रहस्यों का पता लगाया। गांव में रह रहे लोगों के पास यहां एक प्राचीन सभ्यता के होने के प्रमाण मौजूद हैं। गांव के लोगों को खेती में खुदाई के दौरान अब भी प्राचीन सभ्यता के अवशेष मिलते हैं। पुरातात्विक अध्ययन व गांव की खुदाई से गोल्फा गांव के गर्भ में मौजूद प्राचीन सभ्यता का पता लगाया जा सकता है। जिसके लिए राज्य और केन्द्र सरकार को पहल करनी चाहिए।

गोल्फा क्षेत्र में हो रहा प्राकृतिक संसाधनों का अंधाधुंध दोहन
प्रोफेसर गिरधर सिंह नेगी ने बताया कि गोल्फा क्षेत्र में यारसागंबू, खड़िया, पत्थर, रेता, बजरी, खुच्चड़ दाना, जड़ी बूटी, किरमोड़ा, शिलाजीत, झूला, भालू की पित्ती, कस्तूरी का अंधाधुंध दोहन हो रहा है। जिसके चलते गांव के आसपास के पर्यावरण के लिए खतरा पैदा हो गया है। सरकार को व्यास, चौंदास, दारमा व जौहार वैली में हो रही संसाधनों की लूट पर अंकुश लगाने की पहल करनी चाहिए।

मोदी गार्डन नहीं कर पा रहा जड़ी बूटी का संरक्षण
गांव का अध्ययन कर लौटे प्रो.नेगी ने बताया कि ग्राम पंचायत गोल्फा में जड़ी बूटी के संवर्धन के लिए मोदी गार्डन स्थापित किया गया है। लेकिन यह गार्डन क्षेत्र की जड़ी-बूटी के संरक्षण व लोगों को रोजगार देने के क्षेत्र में कोई उल्लेखनीय कार्य नहीं कर पा रहा है। गांव के प्रधान बाला सिंह कोरंगा कहते हैं कि गांव में मिलने वाली जड़ी काला जीरा, धूप जड़ी, जम्बू, गंदर्याण, बड़ी इलायची का और अधिक संरक्षण किए जाने की जरूरत है।

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