बैलून से मिलेगा अब नेटवर्क, देश पहला राज्य बनेगा उत्तराखंड

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पिथौरागढ़(जौलजीवी): मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने कहा है कि चीन व नेपाल के सीमावर्ती क्षेत्रों को संचार सुविधा के लिए अब बैलून नेटवर्क सिस्टम जनवरी माह से शुरू किया जा रहा है। इस सिस्टम को शुरू करने वाला उत्तराखंड देश का पहला राज्य होगा।

मुख्यमंत्री रावत मंगलवार को भारत-नेपाल की सांझी संस्कृति के प्रतीक जौलजीवी मेले का उद्घाटन करने के बाद सभा को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने क्षेत्र में प्रस्तावित पंचेश्वर बांध को देश के लिए महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि डूब क्षेत्र के लोगों की जरूरतों को पूरा करने के लिए राज्य सरकार संकल्पित है।

प्रभावितों के पुख्ता विस्थापन और पुनर्वास के बाद ही परियोजना का काम शुरू होगा। सीमांत क्षेत्र के लिए प्रदेश सरकार को गंभीर बताते हुए कहा कि अब समय आ गया है कि लोग परंपरागत खेती को छोड़कर व्यावसायिक खेती को बढ़ावा दें। उन्होंने लोगों से गुलाब की खेती करने का आह्वान करते हुए कहा कि धारचूला और मुनस्यारी के लोग सहकारिता के माध्यम से इस खेती को बढ़ावा दें।

चिकित्सा सेवा में सुधार के लिए राज्य में हो रहे प्रयासों की जानकारी देते हुए उन्होंने कहा कि प्रदेश को 170 डॉक्टर मिल चुके हैं। दो हजार डॉक्टर शीघ्र ही प्रदेश को और मिलेंगे। इससे राज्य की चिकित्सा व्यवस्था में बड़ा बदलाव आएगा। उन्होंने कहा कि सेना और अर्द्धसैनिक बल के किसी जवान के शहीद होने या तैनाती के दौरान मृत्यु होने पर उसके आश्रित को राजकीय सेवा में लेने वाला उत्तराखंड पहला राज्य बन गया है।

इस दौरान उन्होंने जौलजीवी मेले के लिए पांच लाख रुपये देने सहित 14 घोषणाएं की। उद्घाटन अवसर पर जिले के प्रभारी मंत्री सुबोध उनियाल, धारचूला के विधायक हरीश धामी, गंगोलीहाट की विधायक मीना गंगोला, डीडीहाट के विधायक विशन सिंह चुफाल मौजूद रहे।

क्या है बैलून नेटवर्क

हीलियम गैस से भरे गुब्बारों में नेटवर्क कनेक्टिविटी प्रदान करने वाले उपकरण लगाए जाते हैं। इन गुब्बारों को अतिदुर्गम क्षेत्रों में छोड़ा जाता है। हवा में तैरते इन गुब्बारों से नेटवर्क ठीक उसी तरह मिलता है जैसे मोबाइल टावर से। विषम भौगोलिक परिस्थितियों वाले क्षेत्रों में यह सुविधा कारगर साबित होती है।

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