पर्यटन के क्षेत्र में उत्तराखंड का इंडोनेशिया के साथ करार, पर्यटन मंत्री रहे नदारद

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पर्यटन के क्षेत्र में आने वाले समय में इंडोनेशिया बाली व उत्तराखंड मिल कर काम करेंगे। एक दूसरे से पर्यटन के अनुभव साझा किए जाएंगे। पर्यटन के साथ ही स्वास्थ्य, पर्यावरण संरक्षण, महिला सशक्तिकरण के साथ ही क्षमता विकास की दिशा में धरातल पर ठोस काम किया जाएगा। मुख्यमंत्री आवास में सोमवार को बाली व उत्तराखंड के बीच एमओयू साइन किया गया। राज्य की ओर से सीएम त्रिवेंद्र रावत व बाली के गर्वनर आई माडे मांकू पास्तिका ने एमओयू पर साइन किए।

एमओयू में दोनों नेताओं ने इंडोनेशिया के बाली प्रांत व उत्तराखंड राज्य को सिस्टर सिटी घोषित करने पर सहमति जताई। एमओयू में पर्यटन, संस्कृति, ई गवर्नेंस, स्वास्थ्य, पर्यावरण आदि क्षेत्रों में सहयोग किए जाने पर सहमति बनी। बाली के गवर्नर ने कहा कि उत्तराखंड और बाली दोनों में ही पर्यटन की अपार संभावनाएं हैं। ऐसे में दोनों राज्यों को एक दूसरे के साथ मिलकर काम करना चाहिए। कहा कि आज भी बाली में महाभारत तथा रामायण की प्राचीन कथाएं उतनी ही प्रासंगिक है जितनी कि भारत में। भारतीय पर्यटकों के लिए भी बाली एक पसंदीदा जगह है। हर साल बड़ी संख्या में पर्यटक यहां पहुंचते हैं।

कैबिनेट मंत्री मदन कौशिक ने कहा कि उत्तराखंड के प्रति विशेष लगाव को देखते हुए राज्य सरकार ने बाली के साथ यह सिस्टर सिटी अनुबंध करने का फैसला लिया। कहा कि राज्य को ये अवसर केंद्र सरकार की पहल पर मिला है। इससे दोनों राज्यों आपस में संस्कृति साझा कर सकेंगे। इसका सीधा असर पर्यटन पर पड़ेगा। इस अवसर पर सचिव पर्यटन दिलीप जावलकर, अपर सचिव पर्यटन ज्योति नीरज खैरवाल, संस्कृति निदेशक बीना भट्ट, पूनम चांद, योगेंद्र कुमार गंगवार मौजूद रहे।

बाली में हरिद्वार का विशेष महत्व

गर्वनर आई माडे मांकू पास्तिका ने कहा कि बाली में हरिद्वार व ऋषिकेश का विशेष महत्व है। जो महत्व मुस्लिमों में मक्का और ईसाई समुदाय में येरुशलम का है, वही महत्व हरिद्वार, ऋषिकेश को दिया जाता है। इसी विशेष आकर्षण को देखते हुए उत्तराखंड के साथ विशेष सहयोग किया जाएगा। हरिद्वार, ऋषिकेश को हिंदुओं के प्रमुख तीर्थ स्थल के रूप में विकसित किए जाने में सहयोग किया जाएगा। कहा कि बाली इंडोनेशिया का एक ऐसे प्रांत है, जहां की 90 प्रतिशत आबादी हिंदू है।

एमओयू के समय पर्यटन मंत्री रहे गैरमौजूद

राज्य के पर्यटन के विकास की दिशा में बाली के साथ जिस एमओयू को मील का पत्थर बताया जा रहा है, उसी एमओयू के समय पर्यटन मंत्री की गैरमौजूदगी चर्चा का विषय रही। अफसर की भी पर्यटन मंत्री की गैरमौजूदगी के सवाल पर असहज नजर आए। हालांकि शाम को पर्यटन विभाग की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति में एमओयू को लेकर पर्यटन मंत्री का पक्ष रखा। पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज ने इसे बड़ा कदम बताया। कहा कि वे हरिद्वार तथा ऋषिकेश में बाली के गवर्नर के साथ मौजूद रहेंगे। उन्हें प्रमुख धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व के स्थानों का दर्शन कराएंगे। कहा कि इससे राज्य के पर्यटन तथा संस्कृति को बाली देश में भी लोकप्रियता मिलेगी। कहा कि बाली से आने वाले योग प्रशिक्षुओं को राज्य विशेष सम्मान देगा।

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