उत्तराखंड: आज आये 420 नए मरीज, 09 संक्रमितों की मौत

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प्रदेश के मैदानी जिलों में कोरोना संक्रमण बढ़ रहा है, जबकि पर्वतीय जिलों में इसकी रफ्तार कम हुई है। बीते 24 घंटे के भीतर प्रदेश में नौ मरीजों की मौत हुई है, जबकि 420 और लोग संक्रमित पाए गए हैं। अब कुल संक्रमितों का आंकड़ा 69307 हो गया है।

प्रदेश में सर्दी बढ़ने के साथ ही कोरोना वायरस का खतरा बढ़ता जा रहा है। संक्रमित मामले और मरीजों की मौतें बढ़ रही हैं। मैदानी जिले देहरादून, नैनीताल, ऊधमसिंह नगर व हरिद्वार में फिर से संक्रमित मामलों में तेजी आ रही है। हालांकि पौड़ी, चमोली, रुद्रप्रयाग समेत अन्य पर्वतीय जिलों में संक्रमित मामलों में कमी आई है।
देहरादून जिले में सबसे अधिक 153 कोरोना मरीज मिले हैं। नैनीताल में 51, हरिद्वार में 42, ऊधमसिंह नगर में 38, रुद्रप्रयाग और चमोली में 28-28, पौड़ी में 23, टिहरी में 18, अल्मोड़ा में 17, बागेश्वर में 12, पिथौरागढ़ में 07, चंपावत में 02 और उत्तरकाशी जिले में 01 संक्रमित मिला है।
प्रदेश में नौ संक्रमित मरीजों की मौत हुई है। इसमें एम्स ऋषिकेश में 02, हिमालयन हास्पिटल में 02, सेना अस्पताल पिथौरागढ़ में 01, सुशीला तिवारी मेडिकल कालेज हल्द्वानी में 01, जेएलएन जिला अस्पताल रुद्रपुर में 01, श्री महंत इन्दिरेश हॉस्पिटल में 01, दून मेडिकल कालेज में 01 मरीज ने दम तोड़ा है। अब तक 1128 कोरोना मरीजों की मौत हो चुकी है।
संक्षिप्त रूप से की जा रही गंगा आरती
ऋषिकेश में स्वर्गाश्रम स्थित परमार्थ निकेतन आश्रम के परमाध्यक्ष स्वामी चिदानंद सरस्वती ने कहा कि कोरोना के कारण गंगाघाट पर आयोजित सांध्यकालीन गंगा आरती फिलहाल प्रतिकात्मक रूप में ही किया जा रहा है। यहां देसी, विदेशी पर्यटकों की भीड़ न जुटे इसलिए केवल ऋषिकुमार ही गंगा आरती करते हैं।

बुधवार को दीपावली पर्व मिलन पर आश्रमाध्यक्ष ने एक प्रेसवार्ता आयोजित की। पत्रकारों से बातचीत के दौरान उन्होंने वीरपुर खुर्द में हाईकोर्ट के आदेश पर ढहाए जा रहे आश्रम के बारे में चर्चा की।

आश्रमाध्यक्ष ने बताया कि उन्होंने जनहित के लिए चुप्पी साधी हुई है। कहा जब उन्होंने स्थानीय लोगों से आश्रम के लिए वह जमीन खरीदी थी, तब उन्हें ज्ञात नहीं था कि यह वन भूमि है। वर्ष 2005 में उन्हें ज्ञात हुआ कि यह वन भूमि है।

उन्होंने बताया कि यदि आश्रम की ओर से कोर्ट की कार्रवाई आगे बढ़ती तो इसकी चपेट में कई लोग बेघर हो जाते, यही कारण है कि हमने इस ओर चुप्पी साध दी। इस मौके पर साध्वी भगवती सरस्वती आदि शामिल थे

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