पलायन का दंश झेल रहा यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ का गांव

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देहरादून: जिसने एक बार गांव को अलविदा कहा, दोबारा वहां का रुख नहीं किया। यदि किया होता तो 2.80 लाख घरों में ताले नहीं लटके होते। पलायन का दंश झेल रहे उत्तराखंड की इस स्याह हकीकत से उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का पौड़ी जिले का गांव पंचुर भी अछूता नहीं है।
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सात गांवों वाली उनकी ग्राम पंचायत सीला से अब तक 62 परिवार पलायन कर चुके हैं। इनमें योगी के गांव के सात परिवार भी शामिल हैं। कारणों की तह में जाएं तो पलायन की मुख्य वजह है मूलभूत सुविधाओं के साथ ही शिक्षा व रोजगार के अवसरों का अभाव। स्थिति ये है कि इन गांवों की एक अदद सड़क की आस राज्य बनने के 16 साल बाद भी पूरी नहीं हो पाई है।
उत्तराखंड में पौड़ी जिले के यमकेश्वर ब्लाक की ग्राम पंचायत सीला का तोक पंचूर है योगी आदित्यनाथ का गांव। सीला में पंचुर के अलावा सीला, ठींगाबाज, फेडुवा, गाडसेरा, दालमीसेरा व गलीकावन गांव शामिल हैं। पिछड़ेपन के लिहाज से इन गांवों का हाल भी यमकेश्वर ब्लाक के अन्य गांवों से जुदा नहीं है। ज्यादा वक्त नहीं गुजरा, जब सीला ग्राम पंचायत के सभी गांवों में 155 परिवार निवास कर रहे थे। पलायन के बाद अब इनकी संख्या घटकर 93 पर आ गई है।
सीला के ग्राम प्रधान आशीष रतूड़ी बताते हैं कि मूलभूत सुविधाओं के नाम पर गांवों में पानी व बिजली तो पहुंची, लेकिन विकास की पहली पायदान माने जाने वाली सड़क से ग्राम पंचायत आज भी अछूती है। सभी सात गांवों के लोगों को एक से पांच किमी की दूरी पैदल तय कर रोड हेड ठांगर व कांडी (दुगड्डा- लक्ष्मणझूला मार्ग) तक पहुंचना पड़ता है।
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रतूड़ी बताते हैं कि लगातार संघर्ष के बाद सीला को सड़क से जोडऩे के लिए 2005 में ठांगर-सीला मार्ग स्वीकृत हुआ। 2011 में इसके टेंडर हुए, लेकिन मामला वन कानूनों में उलझ गया। यही नहीं, चार साल पहले एक अन्य सड़क कांडी-फेडुवा-सीला की मंजूरी तो मिली, पर यह भी फाइलों से बाहर नहीं निकल पाई।

 

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