पर्यटन प्रदेश का सच!

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बदहाल हैं पांचवे केदार (कल्पेश्वर) तक पहुँचने का मार्ग. बल्लियों के सहारे बंधी हैं ग्रामीणों और पर्यटकों के जीवन की डोर. आपदा के जख्मो को पीछे छोड़ प्रदेश की चारधाम यात्रा जोरों पर हैं. एक बार फिर से देवभूमि की जीवन रेखा पटरी पर लौट आई हैं. सूबे के पर्यटन मंत्री ने कहा कि हम प्रदेश को पर्यटन हब बनाएंगे, लेकिन सरकार की कोशिशे सिर्फ गंगोत्री, यमुनोत्री, केदारनाथ और बद्रीनाथ तक ही सीमित होकर रह गई हैं. जबकि प्रदेश में 5 बद्री और 5 केदार हैं. जहाँ हर साल हज़ारों तीर्थयात्री और पर्यटक घुमने आते हैं. लेकिन अन्य बद्री केदारों की धरातलीय हकीकत कुछ और ही हैं.

कल्पेश्वर/कल्पनाथ तक पहुँचने के लिए ग्रामीणों को जान हथेली में रखकर बल्लियों के सहारे जाना पड़ रहा हैं, तो वहीँ भविष्य बद्री, तुंगनाथ में मूलभूत सुविधाओं की भारी कमी हैं.

एक और हम पर्यटन प्रदेश का सपना देख रहे हैं, तो दूसरी और पिछले 4 सालो से कल्पेश्वर धाम में एक पुल का निर्माण नहीं हो पाया.सरकारी मशीनरी को चाहिए कि रोज़गार से जुड़ने वाले स्थलों को चिन्हित कर उन्हें प्राथमिकता के आधार पर सुविधाओं से परिपूर्ण कराए, ताकि अधिक से अधिक पर्यटक यहाँ आये.

अब देखना यह होगा कि सरकारी तंत्र यहाँ किसी बड़ी घटना होने से पहले जागता हैं या फिर तत्काल कार्रवाई करता हैं.

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