अंटार्कटिक जाएंगे उत्तराखंड के तीन वैज्ञानिक, बिताने होंगे इतने महीने

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भारत के अंटार्कटिक में महत्वाकांक्षी 37वें साइंटिफिक एक्सपीडिशन के लिए देहरादून से तीन वैज्ञानियों को जाने का मौका मिला है। ये तीनों विज्ञानी 90 सदस्यीय अभियान का हिस्सा बनने के लिए देहरादून से गोवा पहुंच चुके हैं। अंटार्कटिक में विभिन्न शोध कार्यों के लिए चार से 14 माह बिताने होंगे।

रायपुर स्थित डील में तकनीकी अधिकारी विजेंद्र सिंह बिष्ट, संतोष कुमार और अशोक चौधरी इस अभियान दल में कम्युनिकेशन ऑफिसर के रूप में हिस्सा बने हैं। वहां से बीएचएफ, एचएफ और इंटरनेट के जरिए कम्युनिकेट डाटा भारत भेजने में मदद करेंगे। विजेन्दर सिंह तीसरी बार अंटार्कटिक जा रहे हैं जबकि बाकी दोनों का यह पहला अवसर है।

अभियान दल में शामिल वैज्ञानिक विजेंद्र सिंह बिष्ट ने बताया कि दल गोवा तक ट्रेन से, केपटाउन (दक्षिण अफ्रीका) तक पानी के जहाज से, वहां से आगे हवाई मार्ग से जाएगा। अपने स्टेशन मैत्री तक जाने के लिए रशियन शिप और हेलीकॉप्टर की मदद लेनी होगी। केपटाउन से मैत्री स्टेशन पहुंचने में दल को दस दिन लगेंगे। विजेंद्र 2006 में और 2014 में 14-14 माह इस अभियान पर रह चुके हैं। अंटार्कटिक में एकत्र किया डाटा राष्ट्रीय अंटार्कटिक एवं समुद्री अनुसंधान केन्द्र (एनसीएओआर) को भेजा जाएगा।

भारत रखेगा तीसरे स्टेशन की नींव 

अंटार्कटिक में भारत के इस समय मैत्री और भारती नाम से दो स्टेशन काम कर रहे हैं। मैत्री भौगोलिक रूप से दक्षिण अफ्रीका से सैकड़ों मील दक्षिण में और भारती श्रीलंका से सैकड़ों मील दूर दक्षिण में स्थित है। दोनों के बीच तीन हजार किलोमीटर का फासला है। भारत ने 1982 में दक्षिण गंगोत्री के नाम से अंटार्कटिक में पहले स्टेशन की नींव रखी थी। ये स्टेशन अब बर्फ में समां चुका है। मैत्री 1984 और भारती 2014 में स्थापित किए गए। भारत अब अंटार्कटिक में जल्द नया स्टेशन खोलने जा रहा है। 2014 का अभियान दल इसके लिए क्रेन समेत कई जरूरी साजो सामान पहुंचा चुका है। नया स्टेशन मैत्री और रशियन स्टेशन नोवो के बीच बनेगा।

क्या होगा अभियान में 

अंटार्कटिक अभियान में डील, एनसीआरआई, आईआईजी, जीएसआई, एसओआई, इसरो, एनजीआरआई, वाइल्ड लाइफ, एनपीएल, एनसीएओआर जैसे देश के शीर्ष संस्थान के विज्ञानी शामिल हैं। जो वहां भूगर्भ, पर्यावरण-मौसम में बदलाव, भूकंप, ओजोन होल, पृथ्वी के चुम्बकीय प्रभाव, बर्फ-ग्लेशियर के पिघलने की रफ्तार सम्बंधी आंकड़े जुटाएंगे।

अंटार्कटिक की खास बातें 

  • अंर्तराष्ट्रीय संधि के चलते यहां एकत्र डाटा सभी देश आपस में शेयर करते हैं। एक दूसरे के स्टेशन क्षेत्र में जाकर भी डाटा एकत्र किया जा सकता है।
  • अंटार्कटिक का सबसे कम तापमान रशियन स्टेशन में माइनस 83 डिग्री सेल्सियस मापा गया है। औसतन वहां का तापमान माइनस 43-45 है।
  • अंटार्कटिक में चार माह तक दिन और चार माह तक रात रहती है।
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