फिर शासन प्रशासन और सरकार की संवेदनहीनता ने एक जिंदगी को धकेल दिया आखरी पड़ाव पर …..

0

फिर शासन प्रशासन और सरकार की संवेदनहीनता ने एक जिंदगी को आखरी पड़ाव पर धकेल दिया। कौन है ज़िम्मेदार? सियासत, सिस्टम या हमारी सहने की आदत? या हमारे बंट जाने की प्रवृत्ति?
हो सकता है आज कुछ लोगों को सोचने या इसे देखने की भी जरूरत महसूस नहीं हो, लेकिन ये पहला वाकया नही जब ऐसा हुआ। ये बार बार हर बार हो रहा है, कभी डाक्टर की अनदेखी से, कभी डाक्टरों की कमी से लेकिन अपने परिवर को देहरादून और इन दिक्कतों से दूर रखने वाले जन प्रतिनिधियों को इससे कोई फर्क नहीं पड़ता क्योंकि उनका कोई इन दिक्कतों से नहीं गुजरता। वो तो खाना पूर्ति के लिए व्यवस्था के नाम पर यँहा कुछ लोगों को भेजते हैं। उनके लोग उनको जिस पर हीरो बनाते हैं और आखिर में जनता को हासिल होती हैं। अपनों की लाशें।

……तो सवाल ये ही है कि कब तक ये यूँ ही चलता रहेगा? क्या अब हम जागेंगे या फिर और मौतों का इंतज़ार करेंगे?

हम और हमारी व्यवस्था ऐसी कई बहनों, माँओं और अन्य लोगों की मौत के ज़िम्मेदार हैं।

©प्रदेश मीडिया

Loading...