देवभूमि की अनूठी परम्परा,जब अंगारों पर नाच उठे मानव शरीर में देवता

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उत्तराखंड: जाखधार में तीन दिवसीय आयोजित जाख मेले के अंतिम दिन सुबह से ही श्रद्धालुओं की भीड़ जुटनी शुरू हो गई थी, जलते अंगारों के कुंड में जैसे ही जाख देवता ने प्रवेश कर नृत्य करना शुरू किया तो पूरी केदारघाटी यक्षराज (जाख देवता) की जयकारों से गूंज उठी,[ads1]  इस अद्भुत दृश्य को देखने के लिए मंदिर परिसर में हजारों श्रद्धालु मौजूद थे। नृत्य के बाद कुंड की पावन राख को श्रद्धालु अपने- अपने घर ले गए,दोपहर को यक्षराज जाख देवता के पश्वा (मदन सिंह) ढोल-दमाऊं और पारंपरिक वाद्य यंत्रों के साथ नारायणकोटि गांव से नृत्य करते हुए कोठेड़ा और देवशाल होते हुए ढाई बजे जाख मंदिर में पहुंचे।[ads2]

यह दृश्य देखने के लिए सुबह से भी मंदिर में एकत्रित होने लगे थे। मंदिर परिसर में बीते तीन दिन से आयोजन की तैयारियां शुरू हो गई थी। कोठेड़ा के पुजारियों, देवशाल के वेदपाठियों और नारायणकोटि के सेवक- श्रद्धालुओं द्वारा जाख मंदिर परिसर में अग्निकुंड की रचना की गई।

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