बीएड कॉलेजों पर बंदी की तलवार,NCTE ने बदल किये नियम

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राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (एनसीटीई) के रेगुलेशन 2014 में संशोधन ने बीएड कॉलेजों को बंदी की कगार पर पहुंचा दिया है।

नियम के हिसाब से अब बीएड कॉलेजों में केवल नेट-पीएचडी वाली फैकल्टी ही पढ़ा सकेंगे। नियम के हिसाब से उत्तराखंड के कॉलेजों में करीब 1600 नेट-पीएचडी क्वालिफाइड की जरूरत पैदा हो गई है जबकि इसके मुकाबले बमुश्किल 100 क्वालिफाइड युवा उपलब्ध हैं।

एनसीटीई रेगुलेशन में संशोधन के तहत यूजीसी के नियमानुसार नेट-पीएचडी क्वालिफाइड शिक्षक ही बीएड के छात्रों को पढ़ा सकते हैं। अभी तक बीएड कॉलेजों में बमुश्किल एक-दो ऐसे क्वालिफाइड टीचर होते हैं। बाकी सभी एमएड पास युवा कॉलेजों में पढ़ा रहे हैं। नियम का पालन न करने पर कॉलेज बंद कर दिया जाएगा।

पीएचडी भी यूजीसी रेगुलेशन के हिसाब से 2009 से पहले के होने चाहिए। प्रदेश में करीब 123 बीएड कॉलेज हैं। इनमें अनुमानित तौर पर करीब 1600 नेट-पीएचडी क्वालिफाइड की जरूरत है। इसके मुकाबले फिलहाल बमुश्किल 100 क्वालिफाइड फैकल्टी ही कॉलेजों में उपलब्ध है। सूबे में 1500 से ज्यादा नेट-पीएचडी की जरूरत होगी, जिसकी पूर्ति बहुत मुश्किल है। ऐसे में बीएड कॉलेज बंद होने शुरू हो जाएंगे।

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