दूसरों को बिजली देने वाले राज्य की हकीकत, आज भी 4,758 गांवों में नहीं है बिजली

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दरअसल, मणिपुर के सेनापति जिले के लेइसांग गांव में बिजली पहुंचने की खुशी में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ट्वीट कर कहा था कि, ‘देश की विकास यात्रा में 28 अप्रैल 2018 एक ऐतिहासिक दिन के रूप में याद किया जाएगा। कल हमने एक वादा पूरा किया। इससे कई भारतीयों का जीवन हमेशा के लिए बदल जाएगा। मुझे इस बात की खुशी है कि अब भारत के हर गांव में बिजली पहुंच गई है।’
पीएम मोदी के इस ट्वीट से कहीं परे है उत्तराखंड के गांवों की सच्चाई। ऊर्जा विभाग के आंकड़ों के अनुसार, प्रदेश के एक लाख 22618 से ज्यादा लोगों ने अबतक अपने गांव में उजाला ही नहीं देखा है।
https://twitter.com/narendramodi/status/990456201296142336
केंद्र सरकार के खोखले दावे की सच्चाई
यहां विडम्बना ये है कि उत्तराखंड वो राज्य है जो देश के कई राज्यों को बिजली से रोशन करता है। यहां बहने वाली गंगा, भागीरथी, अलकनंदा जैसी नदियों पर बने बड़े-बड़े बांधों में बन रही बिजली से केंद्र और राज्य सरकार करोड़ों रुपये का राजस्व कमा रही है लेकिन आज भी इस प्रदेश के लाखों घर अंधेरे में ही हैं।साल 2000 में राज्य गठन होने से अबतक सरकार चाहे किसी की भी रही हो, सभी सरकारों ने उत्तराखंड को ऊर्जा प्रदेश बनाने की बात कही और दावे भी खूब किये लेकिन अबतक उत्तराखंड ऊर्जा प्रदेश बनना तो दूर  4,758 उप-ग्रामों तक बिजली के खंबे तक नहीं पहुंचे हैं।

सम्भावनायें अपार लेकिन नीयत नहीं ठीक 
यह बात सच है कि उत्तराखंड की विभिन्न नदियों एवं अन्य जल श्रोतों में 40 हजार मेगावाट जलविद्युत उत्पादन की क्षमता है। पिछले 18 सालों में हमारे नीति नियंता इस क्षमता को कार्यरूप नहीं दे पाये। वर्तमान में राज्य पहले के मुकाबले कई ज्यादा परियोजनाएं हैं, जो विद्युत उत्पादन कर रही हैं। उत्तराखंड बनने के बाद टिहरी बांध परियोजना ने उत्पादन शुरू किया, जिसकी रॉयल्टी के रूप में लगभग 12% बिजली उत्तराखंड को मिलती है।

राज्य सेक्टर की बिजली परियोजनाएं लगभग 8 से 10 मेगवाट का उत्पादन ही कर पाती है। राज्य सरकार अपने स्वामित्व वाली अधिकांश परियोजना की उत्पादन क्षमता में भी वृद्धि नहीं कर पाई है। जानकार मानते हैं कि अगर उत्तराखंड राज्य में निहित 40 हजार मेगावाट क्षमता का आधा उत्पादन भी अपनी परियोजनाओं के माध्यम से सरकार कर पायी तो बिजली की जरूरतों को पूरा करने के साथ ही प्रदेश अतिरिक्त बिजली को बेच कर आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन सकता है लेकिन सरकारी उदासीनता के चलते सरकार को करोड़ों की बिजली बाहरी राज्य से खरीदनी पड़ रही है। बताया जा रहा है कि राज्य हर साल एक हजार करोड़ रुपये से ज्यदा की बिजली बाहरी राज्यों से खरीदती है।

सीएम और अधिकारी बोले इस साल हर घर तक चली जाएगी बिजली [adinserter name= “Block 2”]
अब इस मामले में राज्य के मुखिया और सम्बंधित विभाग के अधिकारी भी पीएम के बयान से अलग बयान दे रहे हैं। सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत का कहना है कि पीएम मोदी ने जिस काम को करने का वादा किया था वो पूरा कर लिया है और जल्द ही राज्य में जो उपग्राम अंधेरे में हैं उनको जल्द उजालों से भर दिया जायेगा। वहीं सचिव ऊर्जा राधिका झा का कहना है कि राज्य में गांव-गांव तक बिजली पहुंचाने का काम  2018 दिसंबर तक पूरा कर लिया जायेगा

जब उत्तराखंड प्रदेश के मुखिया और ऊर्जा सचिव इस बात से इनकार नहीं कर सकते है कि उत्तराखंड के हर कोने तक बिजली पहुंचनी बाकि है तो कैसे पीएम मोदी का सपना पहले ही पूरा हो गया।

बता दें कि पीएम मोदी ने 15 अगस्त 2015 को लाल किले की प्राचीर से 1000 दिनों के भीतर गांवों तक बिजली पहुंचाने का एलान किया था।

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