मेडिकल साइंस का कारनामा, लड़के के दोनों हाथ काटकर एक लड़की को दी नई जिंदगी

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भारत में मेडिकल साइंस ने एक ऐसा काम कर दिखाया है, जो कि किसी चमत्कार से कम नहीं है. पुणे के अमृता इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस ने एशिया के पहले दोहरे अंग प्रत्यारोपण में सफलता हासिल की है. केरल की रहने वाली श्रेया जिसने एक गंभीर बस दुर्घटना में अपने दोनों हाथ खो दिए थे, डॉक्टरों ने उसके शरीर में लड़के के नए हाथों का प्रत्यारोपण कर उसे एक नई जिंदगी दी है।

बता दें कि लड़के के मरने के बाद उसके माता-पिता ने उसके अंग को डोनेट करने का फैसला लिया था. श्रेया को केमिकल इंजीनियरिंग स्टूडेंट अस्पताल से छुट्टी दे दी गई है और उसे अब गहन फिजियोथेरेपी और देखभाल से गुजर रही है।

केरल की श्रेया कहती है, मेरी पूरी दुनिया ही खत्म हो गई थी, मुझे कुछ पता ही नहीं चला कि मेरे साथ क्या हुआ. जब मेरी मां ने बताया कि भारत में मेरे हाथों का प्रत्यारोपण किया गया। इससे मुझे थोड़ी शक्ति और उम्मीद जगी। मैंने महसूस किया कि एक दिन मैं पहले की तरह सामान्य जिंदगी जीउंगी और अपनी पढ़ाई जारी रख अपने सपने पूरे कर पाउंगी. बता दें कि, सितंबर 2016 में मंगलौर में अपने कॉलेज के पास श्रेया ने एक बस दुर्घटना में अपने दोनों हाथ खो दिये थे। जब वह दुर्घटनास्थल से हटने की कोशिश कर रही थी तो उसे महसूस हुआ कि उसके हाथ नहीं हैं, क्योंकि वो अलग हो चुके थे। इसके चार महीनों तक श्रेया ने प्रोस्थेटिक हाथों का इस्तेमाल किया लेकिन वह इससे खुश नहीं थी।

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