किसान का बेटा बना सैन्य अफसर तो गर्व से भर गए पिता

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उत्तराखंड चमोली के तलवाड़ी गांव के किसान हिम्मत सिंह बिष्ट का बेटा मयंक बिष्ट शनिवार को पीओपी से पासआउट होकर सेना में अफसर बन गया।

वह परिवार का पहला फौजी अफसर है। मयंक की इस कामयाबी के मौके पर परिजन भी आईएमए में मौजूद रहे। मयंक ने रतन विद्या निकेतन लोलटी से प्रारंभिक शिक्षा ग्रहण करने के बाद केंद्रीय विद्यालय ग्वालदम से आगे की पढ़ाई की। इसके बाद इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में डिप्लोमा किया। मयंक ने सीडीएस के मार्फत आईएमए में एंट्री पाई। मयंक के बडे़ भाई गौरव बिष्ट आईटीबीपी में इंजीनियर हैं। मयंक अपने परिवार के पहले सैन्य अधिकारी हैं।

दादा, पिता के बाद बेटा भी बना सेना में अफसर 
देहरादून। देहरादून के डिफेंस कॉलोनी निवासी व्रतेश कुलाश्री के लिए शनिवार का दिन एतिहासिक रहा। दादा, पिता के बाद वह खुद सेना में अफसर बन गए। उनके पिता विजय कुमार सेना में लेफ्टिनेंट कर्नल हैं और वर्तमान में शिलांग में तैनात हैं। सेना में होने के कारण उनके बेटे व्रतेश की पढ़ाई अलग-अलग शहरों में हुई। उनके दादा राजाराम कुलाश्री भी ऑननरी लेफ्टिनेंट थे। व्रतेश ने बताया कि उन्होंने बचपन में ही तय कर लिया था कि उन्हें सेना में भर्ती होकर देश सेवा करनी है। इसे लेकर जमकर मेहनत की। जिसके फलस्वरूप उनका सेलेक्शन एनडीए में हुआ।

एमएससी करने के बाद चुनी सेना
रामनगर के लोकेश सिंह रावत ने पंतनगर विवि से एमएससी करने के बाद सेना की राह चुनी। शनिवार को हुई पीओपी से पासआउट होकर वह सेना में अफसर बन गए। इस खास मौके पर उनके परिवार में खुशी की लहर है।
रामनगर निवासी लोकेश रावत के पिता नरेंद्र सिंह रावत बीएसएफ से रिटायर्ड हैं। उनकी मां उमा देवी गृहिणी हैं। लोकेश ने जीबी पंत विवि से एमएससी बॉटनी पास की। इसके बाद आर्मी एजुकेशन कोर में कमीशन प्राप्त किया। वह अपने परिवार के पहले सैन्य अधिकारी हैं। उनका कहना है कि बचपन से ही पिता की वर्दी उन्हें सेना के प्रति प्रेरित करती थी। इसलिए उन्होंने एमएससी के बाद सेना की राह चुनी। लोकेश की इस कामयाबी को सेलिब्रेट करने के लिए परिजन भी आईएमए पहुंचे।

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