प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का ड्रीम प्रोजेक्ट,यहां पर पूरी तरीके से फेल होता हुआ दिखाई दे रहा है।

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अब देखना है कि फेल होते जा रहे नमामि गंगे प्रोजेक्ट को बचाने के लिए सरकार क्या कदम उठा पाती है। प्रधानमंत्री का ड्रीम प्रोजेक्ट नमामि गंगे उत्तराखंड में फेल होता हुआ नजर आ रहा है. इंटरनेशनल योग कैपिटल के नाम से विख्यात ऋषिकेश में ही नमामि गंगे की योजना दम तोड़ती दिखाई दे रही है. खुलेआम नाले गंगा में गिरते हुए दिखाई दे रहे हैं .और हाईकोर्ट के आदेशों का खुल्लम खुला उल्लंघन होता दिख रहा है. उत्तराखंड अपनी खूबसूरत नदियों के लिए जाना जाता है. इन नदियों को बचाने के लिए तमाम कोशिशें की जा रही हैं. मगर ऋषिकेश में गंगा नदी लगातार प्रदूषित होती जा रही है. यहां पर गिरने वाले नालों को ठीक तरीके से भी रोका नही जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का ड्रीम प्रोजेक्ट नमामि गंगे भी वास्तव में गंगा नदी में प्रदूषण कई कारणों से हो रहा है। सीवर का पानी बिना साफ किए नदी में छोड़े जाने से सबसे ज्यादा प्रदूषण होता है । इसकी रोकथाम के लिए ही सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट लगाए जाते हैं । मगर ऋषिकेश जैसे पवित्र क्षेत्र में जो ट्रीटमेंट प्लांट है उसकी क्षमता सिर्फ 20 हज़ार जनसँख्या के सीवर को ट्रीट करने की होती है। जबकि ऋषिकेश की जनसंख्या 1 लाख से ज्यादा है। साथ ही हर रोज हज़ारों यात्री यहां सैर सपाटे के लिए आते हैं। यात्रा के दौरान यहां आने वाले भक्तों की संख्या तो लाखों में पहुच जाती है। ऐसे में यह बात बिल्कुल स्पष्ट है कि यहां सीवर का गंदा पानी बिना ट्रेट हुए ही गंगा नदी में छोड़ा जा रहा है । नदियों में बढ़ते प्रदूषण को रोकने के लिए कई बार हाईकोर्ट और ngt आगे आई हैं। मगर तमाम प्रतिबंधों के बावजूद ऋषिकेश में पॉलिथीन का बिकना अभी भी जारी है। इसकी वजह से प्रदूषण का स्तर कई गुना बढ़ जाता है। ऋषिकेस में गंगा सभा के ऊपर मा गंगा की आरती का जिम्मा है। मगर गंगा की खराब होती हालत देखकर सभा भी कई बार सरकार से गुजारिश कर चुकी है। सरकार ने हरिद्वार में अब सीवर ट्रीटमेंट प्लांट की केपेसिटी बढ़ाने की योजना को अंतिम रूप दिया है। मगर ऋषिकेस अभी भी ऐसी किसी भी योजना से वंचित रहेगा। इस काम को राज्य सरकार का पेयजल मंत्रालय देख रहा है।

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