उत्तराखंड: सरकार बदली पर कामकाज ज्यूँ का त्यूं, मालपा में लापता हुए लोगों का प्रशासन के पास नहीं कोई रिकार्ड

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उत्तराखंड: उत्तराखंड में सरकार तो बदली है लेकिन कामकाज का अंदाज वही पूर्ववर्ती सरकारों के जैसा ही है जिसका एक वाकया मालपा में आई आपदा के दौरान भी देखने को मिला जहाँ सरकारी तंत्र को अभी तक यह ही मालूम नहीं है की इस आपदा में कितने जनमानस का नुकसान हुआ है इनका कोई भी प्रमाणित रिकॉर्ड सरकारी तंत्र के पास नहीं है .

मालपा में आपदा के बाद लापता बताए जा रहे लोगों की वास्तविक संख्या बढ़ सकती है। प्रशासन के पास वहां रहने वाले लोगों का कोई रिकार्ड नहीं है। जिस कारण आपदा में लापता लोगों की संख्या की जानकारी प्रशासन आपदा के चार दिन बाद भी दे पाने की स्थिति में नहीं है। आपदा में पूरे रास्ते बंद हो जाने व मौसम खराब होने के कारण प्रशासन की टीम दो दिन बीत जाने के बाद बाद प्रभावित क्षेत्र में पहुंची। तब तक मलबे में दबे 6 शव निकाल लिए गए थे। प्रशासन के अनुसार पांच लोग ज्ञात व 12 नेपाली श्रमिक आपदा के बाद से लापता चल रहे हैं।

स्थानीय लोगों के अनुसार इस आपदा में लापता नेपाली श्रमिकों की संख्या 50से अधिक है। ऐसे में प्रशासन के सामने लापता लोगों की संख्या का आंकड़ा जुटा पाना ही मुश्किल हो गया है। मालपा में जिस तरह से सर्च अभियान बंद करने की बात की जा रही है। ऐसे में यदि इस अभियान को ब्रेक लगा तो मालपा हादसे के वास्तविक लापता लोगों की संख्या कभी समाने नहीं आ सकेगी। केदारनाथ की त्रासदी से भी नहीं लिया सबक पिथौरागढ़। केदार नाथ की त्रासदी के बाद भी प्रशासन वहां आपदा में लापता लोगों की संख्या नहीं बता सका था।

इस आपदा के बाद तब भाजपा नेत्री सुषमा स्वराज ने संसद में उत्तराखण्ड सरकार को जमकर घेरा था। उन्होंने कांग्रेस सरकार को यात्रियों का डाटा बेस बनाने व प्रत्येक यात्री को माइक्रो इलेक्ट्रानिक चिप देने का सुझाव दिया था।जिससे आपदा की स्थति में संबंधित यात्री की लोकेशन ट्रेस की जा सके।यहां उत्तराखण्ड में भाजपा की सरकार बन गई। लेकिन भाजपा ने मानसूनकाल से पहले अपनी ही नेता के तब कांग्रेस को दिए गए सुझाव पर गौर नहीं किया। परिणाम यह है कि सरकार और प्रशासन आपदा में लापता लोगों की संख्या का लेकर हवाई तीर छोड़ रहे हैं। वास्तविक संख्या को लेकर सिवाय लाचारी प्रकट करने के उसने सामने कोई विकल्प नहीं है।

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