माँ की ममता को एक शेयर जरूर करें

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फोटो अनिल डोगरा

माँ की ममता – मां ईश्वर की एक सर्वश्रेष्ठ रचना । मां केवल एक शब्द ही नही अपितु एक जीवन की सम्पूर्ण अध्याय है । कहते है प्यार अंधा होता है शायद ये बात किसी ने मां को ही समक्ष रख कर लिखी होगी । मां अपने बच्चे को बिना देखे जब वह उसकी कोख में होता है तब से ही उसे एक निःस्वार्थ भाव से प्रेम करती है हो सकता है वह उत्पतित आगे जाके मां को अपने साथ मे भी रखने पर सहमत ना हो किंतु मां फिर भी उस से प्रेम करती है । अगर वह बच्चा थोड़ी देर के लिए भी मां की आंखों से ओझल हो जाये तो माँ का हृदय विदीर्ण हो जाता है । मां तो माँ होती है चाहे वह मनुष्य की हो या किसी भी जीव की । मां का हृदय सदैव अपनी संतान के प्रति विचाराधीन होता है किसी भी अप्रत्याशित घटना के लिए सदैव संतान के साथ मां कदम से कदम मिला कर चलते दिखती है । किसी अंजान व्यक्ति के पास अगर अपने बच्चे को कुछ देर छोड़कर किसी काम को कर रही होती है तो पूरा ध्यान बस संतान की ओर लगा रहता है । और अगर किसी भी परिजन या सगे संबंधियों के साथ संतान को कहीं भेज दे तो जब तक संतान गंतव्य तक ना पहुच जाए मां का हृदय बस ईश्वर से प्रार्थनारत रहता है ।
मां से ही घर ही और जीवन की सुरुवात भी मां है । अगर माँ का ममत्व जीवन में ना हो तो जीवन की सम्पूर्ण सार्थकता सार्थक नही होती । मां के एक रूप को सार्थक करते मुनव्वर राना जी के कुछ शब्द –
देख अंधेरे तेरा मुह काला हो गया
मां ने आंखें खोली घर में उजाला हो गया
आज के आम जन जीवन में लोगों का अभिप्राय मां अर्थात मानव की मां तक ही सीमित हो गया है । लेकिन आम जन तक एक अमिट छवि दिखाता यह एक छायाचित्र माँ को दुनियां में ईश्वर से भी उच्च पदवी प्रदान करता है । जब एक मां अपने बच्चे के पीछे दौड़कर अपनी परवाह न करते हुए अपनी संतान के लिए बदहवास स्थिति में कहीं मेरी संतान मेरी आँखों से ओझल ना हो जाये अपनी निगाहें समरूपता से अपने बच्चे पर टिका कर चल रही है । यह छायाचित्र प्रदर्शित करता है कि मां का कोई स्वरूप नही होता मां बस मां होती है जो अपनी संतान को स्वयं से भी अधिक प्रेम करती है । यह छायाचित्र प्रदर्शित करता है एक मां की सम्पूर्ण ममता को यह दर्शाता है कि मां अपने बच्चे को किस हद्द तक प्यार करती है । यह एक पशु मात्र है किंतु अपने बच्चे को किसी और के साथ देख कर इसका ममत्व उमड़ पड़ा और यह निर्बाध गति से अपने बच्चे के पीछे पीछे दौड़ाने लगी ।
देहरादून के डोईवाला के जंगल से गाय के साथ गुजरते इस गुजर को देखिए उसने गाय का एक नन्हा सा बछड़ा अपनी पीठ पर लाद रखा है । बछड़े को पीठ पर लादकर ले जाने का कारण वहा बछड़ा अभी कुछ दिनों का है और इतने लम्बे रास्ते को देखते हुवे गुजर नें बछड़े को अपनी पीठ पर लादकर ले जाने लगा लेकिन माँ की ममता को तो देखिये किस तरहा वह गाय गुजर के साथ कदम से कदम मिलाकर दौड़ी चली जा रही है। शायद उसे लगता है कि यह व्यक्ति उसके बछड़े को लेकर कहीं खिसक न जाए । इसी लिए कहते हैं माँ सर्वश्रेष्ठ है ।

संवादाता पवन नैथानी

 

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