उत्तराखंड: टाटा मोटर्स में उड़ी श्रम कानून की धज्जियां, तड़प-तड़प कर मरा श्रमिक, मचा बवाल

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रूद्रपुर: सिडकुल स्थित टाटा मोटर्स में ड्यूटी के दौरान श्रमिक की मौत होने से गुस्साए साथी श्रमिकों ने बवाल मचा दिया है. एचआर ऑफिस के सामने आंदोलनकारी श्रमिकों ने मृतक के परिवार को 25 लाख का मुआवजा और 1 परिवार के सदस्य को नौकरी दिलाने की मांग की है.

बता दें कि बीती 28 अप्रैल की सुबह टाटा मोटर्स के इंजन शॉप में अस्थाई श्रमिक के रूप में कार्यरत संदीप विश्वकर्मा अचानक काम करते-करते बेहोश हो गए थे. अचानक संदीप के गिरने से काम कर रहे दूसरे श्रमिकों में हड़कंप मच गया. आनन फानन में फैक्ट्री के मेडिकल डिपार्टमेंट को फोन किया गया. आरोप है कि एक घंटे तक श्रमिक को कोई मेडिकल उपचार न मिलने से वह वहीं बेसुध पड़ा रहा और उसकी मौत हो गई.

समय पर इलाज मिलता तो बच जाती संदीप की जान

आंदोलनकारी श्रमिको का आरोप है कि जब संदीप बेहोश पड़ा हुआ था तब उन्होंने फैक्ट्री की मेडिकल हेल्प लाइन को फोन किया था. लेकिन मेडिकल ऑफिसर ने एंबुलेंस के सिक्योरिटी ऑफिस के बाहर खड़े होने की बात कही और इसी तरह करीब 1 घंटे तक संदीप जमीन पर पड़ा रहा और जब एंबुलेंस आई तब-तक संदीप की जान जा चुकी थी. सूत्रों के मुताबिक टाटा मोटर्स कंपनी में समय पर इलाज न मिलने के चलते इससे पहले भी कई श्रमिकों की मौत हो चुकी है लेकिन हर बार फैक्ट्री प्रबंधक ने मामले को दबा दिया.

अस्थाई श्रमिकों के साथ होता है टाटा मोटर्स में उत्पीड़न

बताया जा रहा है कि 28 तारीख को ए-शिफ्ट में काम करने पहुंचे संदीप विश्वकर्मा ने इससे पहले बी-शिफ्ट की ड्यूटी की थी. ऐसे में अंदेशा जताया जा रहा है कि काम के दबाव के चलते संदीप हार्टअटैक का शिकार हो गया. नाम न बताने की शर्त पर एक श्रमिक ने बताया कि टाटा मोटर्स में अस्थाई श्रमिकों के साथ काफी लंबे समय से उत्पीड़न हो रहा है. यही वजह है कि श्रमिक लगातार दो-दो शिफ्ट में काम करने को मजबूर हैं. इसके साथ ही सालभर बाद श्रमिको को नौकरी से निकाल दिया जाता है.

श्रम कानून की उड़ती है यहां धज्जियां

टाटा मोटर्स में कार्यरत परमानेंट श्रमिक ने बताया कि मृतक श्रमिक अप्रेंन्टिस के तौर पर 1 साल के लिए कार्यरत था. ऐसे में श्रम कानून के अनुसार अप्रेंन्टिस करने वाले श्रमिक को ट्रेनिंग और क्लास दिया जाना आवश्यक है. लेकिन टाटा मोटर्स में इस नियम को दरकिनार करते हुए अप्रेंन्टिस करने वाले श्रमिक से भी पूरी शिफ्ट में काम कराया जाता है. हालांकि इसके एवज में उन्हें सरकारी नियम के तहत मिलने वाली तनख्वाह से ज्यादा रकम दी जाती है.

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