अशासकीय विद्यालयों में 25-25 लाख रुपए रिश्वत लेकर की गई शिक्षकों की भर्ती

एलटी से लेकर प्रवक्ता तक के पदों पर हुई नियुक्तियों में बड़ा खेल, जांच में सामने आया मामला, कार्रवाई के नाम पर सिर्फ लीपापोती

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देहरादून: अशासकीय विद्यालयों में नियुक्तियों को लेकर लगातार सामने आ रही प्रबंधन की मनमानी के बाद सरकार ने अशासकीय विद्यालयों में चल रही सभी नियुक्तियों को रद्द कर दिया है। सरकार के नए प्रावधान के मुताबिक अब अशासकीय विद्यालयों में अध्यापकों की नियुक्तियां इंटरब्यू और अनुभव से नहीं, बल्कि एकेडमिक मेरिट के आधार पर होगी। इसमें प्रबंधन की मनमानी नहीं चल पाएगी। मौजूदा सत्र में जिन विद्यालयों में नियुक्ति प्रक्रिया चल रही है, वहां अब नए नियमों के आधार पर नियुक्तियां होंगी। उधर, सरकार के इस फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट जाने की धमकी दी है।

शिक्षा मंत्री अरविंद पांडे ने बताया कि चुनाव आचार संहिता लागू होने के बाद कुछ अशासकीय विद्यालयों में मनमाने ढंग से नियुक्तियां हुई हैं। अल्मोड़ा के आर्य कन्या विद्यालय में 25-25 लाख रूपये लेकर नियुक्तियां करनी की शिकायत मिली थी, जो विभागीय जांच में सही पाई गई। विद्यालय प्रबंधन ने ठंटरब्यू और अनुभव में अधिक अंकर देकर कम मेरिट वालों को नियुक्ति दे दी। जांच में आरोपों की पुष्टि होने के बाद माजूदा शिक्षा सत्र में हई सभी नियुक्तियां रद्द कर दी गई है। साथ ही जिन विद्यालयों में नियुक्ति प्रक्रिया चल रही है, उन्हें भी नए सिरे से कवायद करनी होगी।

यह भी प्रावधान किया गया कि नई विज्ञप्ति जारी कर उन्हें केवल एकेडमिक की मेरिट के आधार पर नियुक्ति देनी होगी। गढ़वाल के 208 और कुमाऊं के 130 अशासकीय विद्यालयों में नियुक्ति होनी है। विज्ञप्ति जारी होने के बाद मुख्य शिक्षा अधिकारी और विद्यालय प्रबंधन मेरिट तैया कर नियुक्तियां देंगे। दूसरीओर जांच में पैसे लेकर नियुक्तियां देने के आरोपों की पुष्टि के बाद कार्रवाई के सवाल पर शिक्षा मंत्री मुस्करा के टाल गए। उन्होंने कहा कि जिन्होंने पैसे लिए और जिन्होंने दिए वे दोनों अब एक दूसरे से निपटेंगे। गंभीर सवाल यह है कि सरकार अशासकीय विद्यालयों के प्रबंधनों की मनमानी पर कार्रवाई करने के मूड में नहीं है। ठोस कार्रवाई के बजाय सिर्फ डराकर काम चलाने की प्रदेश सरकार की कार्यप्रणाली ही सवालों के घेरे में आ गई है।

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