राजनीतिक उथल पुथल – नौकरशाही में अस्थिरता का आलम, 17 साल के उत्तरखंड में 15वें मुख्य सचिव ने किया अपना पदभार ग्रहण

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17 साल के उत्तरखंड में 15वें मुख्य सचिव उत्पल कुमार सिंह ने अपना पदभार ग्रहण कर लिया है. प्रदेश के गठन के समय से यहां जिस अनुपात में राजनीतिक अस्थिरता देखने को मिली उसी अनुपात में नौकरशाही में भी उथल पुथल देखने को मिली, यही वजह है कि 17 सालों में अब तक 9 सीएम इस प्रदेश ने देखे और नौकरशाही में अस्थिरता का आलम यह रहा कि अमूमन एक मुख्य सचिव का कार्यकाल एक साल रहा. किसी भी प्रदेश के विकास के लिए जितनी राजनीतिक स्थिरता ज़रूरी है उतनी ही ज़रूरी नौकरशाही में स्थिरता भी है. बता दें कि अब तक मुख्य सचिव रहे एस रामास्वामी तो एक साल का कार्यकाल भी पूरा नही कर पाए. नौकरशाही में हालात यह रहे हैं कि यूपी से विभाजन के बाद बने नए उत्तराखंड के पहले मुख्य सचिव अजय विक्रम सिंह महज़ सात महीने ही अपने पद पर बने रह सके. राज्य में सबसे तेज़ अफसरों में गिने जाने वाले राकेश शर्मा महज 4 महीने ही अपने पद पर बने रह सके. हालांकि नौकरशाही के सबसे बड़े पद में थोड़ी स्थिरता 2003 से 2005 तक रही, जब आरएस टोलिया को इस पद पर बैठाया गया. टोलिया के नाम अब तक सबसे लंबे समय तक मुख्य सचिव के पद पर रहने का रिकॉर्ड है. वह एक सितंबर, 2003 से 4 अक्टूबर, 2005 तक राज्य के मुख्य सचिव रहे. यांनि 2 साल और एक महीने. इससे अंदाज लगाया जा सकता है कि जब नौकरशाही के इस बड़े पद पर 2 साल भी कोई काम स्थिरता से नही कर पाएगा तो जाहिर तौर पर विकास के काम प्रभावित होंगे. राहत की उम्मीद इस बात से मिलती है कि अगर नए सीएस उत्पल कुमार सिंह से राज्य सरकार संतुष्ट रही तो वह इस पद पर 2 साल बने रह सकेंगे क्योंकि उनकी रिटायरमेंट 2020 में होनी है. अब जबकि प्रदेश में पहली बार प्रचंड बहुमत की सरकार बनी है तो ये उम्मीद की जा सकती है कि नौकरशाही में भी स्थिरता आएगी.

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