जोशीमठ प्रखंड के लोग तीन दिनों से अँधेरे में रहने के लिए मजबूर!

0

जोशीमठ प्रखंड में विगत तीन दिनों से अँधेरा पसरा हुआ है। कालागढ़ से जोशीमठ के लिए विद्युत आपूर्ति होने वाली 66 हजार किलोवाट की लाइन चमोली और बिरही के पास तीन दिन पूर्व हुए तूफान से क्षतिग्रस्त हो गयी है। ज्ञान्तब्य हो कि चमोली जिले के जोशीमठ में भारत सरकार और उत्तराखंड राज्य सरकार की लगभग आधा दर्जन छोटी-बड़ी जल विद्युत निर्मित है या फिर निर्माणाधीन है। फिर भी यहाँ के लोगों को अँधेरे से जूझना पड़ रहा है। ये सरकारों के लिए शर्मनाक बात है कि ऊर्जा क्षेत्र में अहम् भूमिका निभाने वाला जोशीमठ प्रखंड अपने भविष्य को अधर में रखकर भी राष्ट्रीय विकास के लिए घर, मकान, जमीन सब जल विद्युत परियोजना निर्माण में न्योछावर कर देता है फिर भी अँधेरे में रहने को मजबूत! राष्ट्रीय “विस्थापन एवं पुनर्वास” नीति के तहत स्थानीय ग्रामीणों को परियोजना द्वारा राज्य को दिये जाने वाले 12 प्रतिशत लाभांश का 1 प्रतिशत स्थानीय प्रभावितों को देने की कानूनन बाध्यता है फिर भी लोगों के हाथ खाली के खाली है। ये कैसा अन्याय है? क्या अपने स्थानीय संसाधनों पर हक़-हकूक मांगने के लिए लोगों को नक्सलवादी या फिर माओवादी जैसी नीति अख्तियार करनी पड़ेगी? असल में इस प्रकार के क्रूर आंदोलन के लिए सरकारें लोगों को बाध्य करती है ये बात सत्य है। लूट और भ्रष्टाचार के आशियाने के नीचे सरकारें लोगों के हितों से खिलवाड़ करती है बदले में गुस्साए लोगों के पास क़ानून अपने हाथ में लेने के सिवाय और कुछ नहीं होता है। समय रहते ही सरकारें छोटी समस्याओं को शांतिपूर्वक निपटा लें तो आंदोलन क्यों होगा और क्यों आंदोलन उग्र होगा ये समझने वाली बात है।

Loading...