पांडवाज की ‘फुलारी’ की धूम आज कल हर जगह

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आजकल पांडवाज की फुलारी खूब फल फूल रही है ,ये फुलारी कुछ और नहीं बल्कि PANDAVAAS CREATIONS का नया गीत है जो यूट्यूब पर धूम मचा रहा है। गीत को कुछ ही दिनों में ही 65 हजार से ज्यादा Views मिले हैं। इसके अलावा व्हाट्स एप, फेसबुक समेत अन्य सोशल साइटों पर भी गीत को खूब लाइक और शेयर किया जा रहा है। पांडवाज की टाइम मशीन सीरीज का पहला गीत ‘घुघुती-बासुती’ भी खूब पसंद किया गया था। इस गीत को अब तक 73 हजार से ज्यादा लोग देख चुके हैं। 

श्रीनगर गढ़वाल के डोभाल भाइयों का प्रोडक्शन हाउस टाइम मशीन सीरीज के तहत पहाड़ के उन पारंपरिक लोक गीतों को नए अंदाज में लोगों के बीच ला रहा है, जो कभी बेहद प्रसिद्ध रहे हैं। बसंत के मौके पर पहाड़ में मनाए जाने वाले फूलदेई के त्योहार के दौरान बच्चों के घर-घर जाकर दहलीज पर ताजे फूल डालने की परंपरा है। इस त्यौहार के अवसर  बच्चों द्वारा जाते आते लोक गीतों को गया जाता था जिनमे से एक गीत यह भी है ,चला फुलारी फूलु कु, सौदा-सौदा फूल बिरौंला गुनगुनाते हुए बच्चे फूल इकट्ठा करते हैं और उन्हें गांव के हर घर के बाहर देहली पर  डालते हैं। इसके बदले में लोग बच्चों को गुड़, चावल और अन्य चीजें देते हैं।

पलायन और वक्त बदलने के साथ अब फूलदेई के त्योहार में कुछ रंगत कम हुई है ।  इसको लेकर पांडवाज ने प्रख्यात लोक गायक नरेंद्र सिंह नेगी के सुप्रसिद्ध गीत हे जी सारियूं मां फूली गे होली फ्योंली लयेडी गीत को जोड़ते हुए वीडियो तैयार किया है। सुप्रसिद्ध रंगकर्मी डा. डीआर पुरोहित और प्रेम मोहन डोभाल ने उसमें नई लाइनें जोड़ते हुए पहाड़ के लोक रंग से अच्छा पिरोया है |

वीडियों में संगीत इशान डोभाल ने दिया है जबकि डायरेक्शन सलिल डोभाल का है। कुणाल डोभाल ने वीडियो तैयार किया है। गीत को कविंद्र नेगी, अंजली खरे, अनामिका वशिष्ठ और सुनिधि वशिष्ठ ने अपनी आवाज दी है। कविंद्र सिंह, अनूप डोबरियाल और द क्रिएटिव एकेडमी रुद्रप्रयाग के बच्चों ने एक्टिंग की है। इसकी शूटिंग दिल्ली, ऋषिकेश, देहरादून, बारसू, चोपता और अरकणी गांव समेत आस-पास के इलाकों में हुई है।

  • लोकसंस्कृति के संरक्षण व संवर्धन के लिए pandavaas creation का सार्थक प्रयास है ।
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