अब ऋषिकेश एम्स में दिल्ली एम्स की तरह होगा इलाज

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शुल्क की दरें बढ़ाने पर आमजन का विरोध झेल रहा ऋषिकेश अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) प्रशासन को आखिर झुकना पड़ा है। एक महीने पहले लागू की गई नई शुल्क दरों को अब वापस लेने का निर्णय लिया गया है। आज से तीन दिन बाद दिल्ली एम्स में शुल्क की निर्धारित दरों को ऋषिकेश में यथावत लागू कर दिया जाएगा। रविवार को पशुलोक बैराज मार्ग स्थित एम्स संस्थान में डिप्टी डायरेक्टर अंशुमन गुप्ता, मुख्य चिकित्सा अधिकारी डा. मुकेश त्रिपाठी, उप मुख्य चिकित्साधीक्षक डा. बलराम जीओमर और मुख्य वित्त एवं लेखाधिकारी धनप्रकाश लखेड़ा ने संयुक्त रूप से पत्रकारवार्ता में 5 अक्तूबर 2017 को एम्स में इलाज की बढ़ाई दरों पर सफाई दी। एम्स डिप्टी डायरेक्टर ने बताया कि एम्स प्रोजेक्ट फेज खत्म होने के बाद मेंटीनेंस फेज में जा रहा है। ऐसे में सामान्य वित्तीय नियम के अनुसार दरों में संशोधन होते रहते हैं।

नियमानुसार प्रत्येक तीन साल में दरों को रिवाइज करना होता है। लेकिन स्थानीय एम्स में तीन साल से शुल्क दरों में वृद्धि नहीं होने पर इलाज की दरें बढ़ाई गईं। हालांकि बीपीएल कार्ड धारकों का उपचार अभी भी निशुल्क हो रहा है। मुख्य चिकित्साधिकारी ने बताया कि दिल्ली एम्स और स्थानीय एम्स की दरों में ज्यादा अंतर नहीं है, लेकिन आमजन को उपचार महंगा लग रहा है। लिहाजा जनहित में एम्स प्रशासन ने बढ़ी हुई दरों को वापस लेने का निर्णय लिया है। जो दरें दिल्ली में लागू हैं उसे स्थानीय एम्स में यथावत तीन दिन बाद लागू कर दिया जाएगा। एम्स राज्य के पर्वतीय और मैदानी क्षेत्र के लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सेवा उपलब्ध कराने के लिए कृत संकल्प है।

एम्स में इलाज की महंगी दरों पर मीडिया कर्मी एम्स प्रशासन से सवाल कर रहे थे। इस बीच मुख्य वित्त एवं लेखाधिकारी बोल पड़े एम्स की स्थापना एक हजार ओपीडी के लिए नहीं की गई है। करोड़ों का खर्च 15 से 20 हजार की ओपीडी के लिए किया गया है। इस तरह का जवाब सुनकर मीडिया कर्मियों ने सवाल उठाया कि एम्स की स्थापना जनहित के लिए नहीं, बल्कि कमाई के लिए की गई है। इस पर सभी चुप्पी साध गए।

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