अफ्रीकी छात्रों पर हमला, 44 लोगों पर केस दर्ज

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पिछले दिनों अफ्रीकी छात्रों के खिलाफ हुए प्रदर्शन और मारपीट का मामला लगातार सुर्खियों में बना हुआ है। लोगों के जहन में सवाल है कि पिछले कई सालों से यहां रह रहे अफ्रीकी छात्रों के खिलाफ स्थिति अचानक इतनी ‘विस्फोटक’ कैसे हो गई? दरअसल, बड़ी संख्या में शिक्षण संस्थानों के कैंपस ग्रेटर नोएडा में खुलने के साथ ही परी चौक और नॉलेज पार्क जैसे इलाकों में पिछले कुछ सालों में विदेशी छात्रों की संख्या काफी बढ़ी है। इन विदेशी छात्रों में बड़ी संख्या अफ्रीकियों की है। आज इस इलाके में 6,000 अफ्रीकी छात्र रहते हैं। छात्रों की संख्या बढ़ने के साथ ही यहां किराएदारी के मार्केट में भी बड़ा उछाल आया। स्थानीय लोग अपने घर इन छात्रों को किराए पर देने लगे, लेकिन स्थानीय नागरिकों और अफ्रीकी छात्रों के रिश्ते कभी सहज नहीं हो पाए। साल दर साल वक्त बीतने के बाद भी दो संस्कृतियों के बीच की यह ‘दूरी’ कम नहीं हो पाई, बल्कि संदेह और बढ़ता चला गया। सोमवार को परी चौक पर अफ्रीकी छात्रों के खिलाफ हुए प्रदर्शन में यह ‘कटुता’ साफ देखने को मिली। प्रदर्शनकारी सभी अफ्रीकी छात्रों को नाइजीरियन बता रहे थे। वे 16 साल के किशोर मनीष की मौत के मामले में पांच ‘नाइजीरियन’ छात्रों की गिरफ्तारी की मांग कर रहे थे। लोगों को आरोप था कि मनीष की मौत उस ड्रग्स के ओवरडोज की वजह से हुई, जो अफ्रीकी छात्रों ने उसे दिया था।

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