नंदा के मायके में लोकजात की तैयारी शुरू! १५ अगस्त से होगी प्रारम्भ! बेदनी, बालपाटा और नरेला बुग्याल में सम्पन होगी लोकजात।

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आखिरकार एक साल के इन्तजार के बाद एक बार फिर नंदा के मायके में लोकजात को लेकर तैयारी शुरू हो चुकी है। नंदा के मायके में इस बार लोकजात यात्रा १५ अगस्त से शुरू होगी और 28 अगस्त को हिमालयी उच्च बुग्याल में तर्पण और पूजा अर्चना के उपरांत लोकजात वापस लौटेगी।

गौरतलब है की सीमांत जनपद चमोली में प्रत्येक साल भादों के महीनें नंदा अष्टमी की यात्रा अर्थात वार्षिक लोकजात आयोजित होती है। जनपद के ७ विकासखंडों के ८०० से अधिक गांवों व अलकनंदा, बिरही, नंदाकिनी, पिंडर घाटी की सीमा से लगे गांवों के लोग इस लोकोत्सव में शामिल होते हैं। जिसमे लोकजात नंदा के सिद्धपीठ कुरुड मंदिर से शुरू होती है। यहाँ से प्रस्थान कर राजराजेश्वरी बधाण की नंदा डोली बेदनी बुग्याल में, कुरुड दशोली की नंदा डोली बालपाटा बुग्याल और कुरुड बंड भुमियाल की छ्न्तोली नरेला बुग्याल में नंदा सप्तमी/ अष्टमी के दिन पूजा अर्चना कर, नंदा को समौण भेंट कर लोकजात संपन्न होती है। जिसके बाद डोली और छ्न्तोली अपने अपने रास्तों से वापस लौट आती हैं। नंदा की ये वार्षिक लोकजात १२ वर्ष में आयोजित होने वाली नंदा देवी राजजात से कई मायनों में बेहद बृहद और भब्य होती है। लोकजात के दौरान गांवो से लेकर डांडी-कांठी माँ नंदा के जागरों से गुंजयमान हो जाती है। साथ ही दांकुडी, झोडा, चांचरी, की सुमधुर लहरियों से माँ नंदा का मायका अलोकिक हो जाता है। नंदा की लोकजात के लिए गांवो में तैयारियां शुरू हो गई है। गांवो में साफ़ सफाई से लेकर लोकजात के लिए लोगों ने अपनी दयाणीयों को न्योता भेजा जा चुका है। नंदा देवी राजराजेश्वरी मंदिर कमेठी कुरूड के अध्यक्ष मंशाराम गौड़ ने लोकजात के पड़ावों पर सभी मुलभुत सुविधाओं उपलब्ध कराने मांग की है।

 

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