टिहरी जिला मुख्यालय स्थित अधिकांश विभागीय कार्यालयों में किसी बड़ी अनहोनी की इंतजारी

0

टिहरी जिला मुख्यालय में अग्नि सुरक्षा ताक पर है। जिला मुख्यालय स्थित अधिकांश विभागीय कार्यालयों में प्राथमिक अग्नि रोधक संयत्र एक्सपायरी डेटेड हैं, सालों से सो पीस बने इन संयत्रों को न तो बदलाया गया और ना ही इनको रिफिल करवाया गया। कई महत्वपूर्ण रिकार्ड रखने वाले कुछ विभाग तो ऐसे भी हैं, जंहा इन संयत्रों को लगाना भी आजतक मुनासिब नही समझा गया। ऐसे में कब कोई दुर्घटना हो जाय कहा नही जा सकता।

करीब 25 साल पहले जब टिहरी बांध विस्थापित और प्रभावितों के लिये नई टिहरी को मास्टर प्लान सिटी की तर्ज पर बसाया जा रहा था, तब नीति नियंताओं ने इस बात का जरा भी ध्यान नही रखा कि इस शहर को आग से बचाने के लिये इंतजाम भी किये जांय। नई टिहरी, बी पुरम और कोटी कालोनी करीव 20 कीलोमीटर के दायरे में फैला नगर पालिका क्षेत्र है, फिर भी इतने बड़े क्षेत्र में दमकल की गाड़ियों को पानी भरने के लिये एक भी फायर हाइडेन्ट नही बनाया गया, जबकि पुरानी टिहरी में 8 फायर हाइडेन्ट बने हुये थे।

यही नही नई टिहरी में जिला मुख्यालय स्ािापित किया गया और अब अधिकांश विभागीय कार्यालय नई टिहरी में हैं, लेकिन अधिकांश कार्यालयों मे लगाये गये अग्नि रोधक संयत्र पुराने और एक्सपायरी डेटेड हैं। कलेक्टैट भवन में हाजरील तो लगाये गये हैं, लेकिन इनको ंपानी के टेंक से जोड़ा ही नही गया। यही हाल सीडीओ कार्यालय, वन विभाग , सीएमओ कार्यालय, तहसील कार्यालय ओर पुनर्वास निदेशालय सहित अन्य विभागीय कार्यालयों के हैं।

इन कार्यालयों में आग से बचाव के लिये दिखाने के लिये वाटर सीओटू, एबीसी, डीसीपी और सीओटू के सिलेंडर टंगे हुये हैं, लेकिन अधिकतर विभाग ने अग्निसमन अधिकारी के सिलेन्डर रिफिल कराने के सुझावों को दरकिनार किया हुआ है।

 

Loading...