मीडिया लिटरेसी बनाती है हमें सक्रिय, सजग और ज़िम्मेदार नागरिक -PRSI

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देहरादून। पब्लिक रिलेशन सोसाइटी ऑफ़ इंडिया के देहरादून चैप्टर के द्वारा दिनांक 10 जनवरी, 2021 को गलत सूचना की महामारी से बचने के लिए तार्किक सोच एवं मीडिया साक्षरता की अलख जगाने के उद्देश्य से फैक्टशाला वर्कशॉप का आयोजन किया गया। अनिल सती सचिव पी आर एस आई  देहरादून चैप्टर ने कहा की पी आर एस आई भविष्य में भी इस तरह के कई आयोजन करवाने के लिए तत्पर है। इस कार्यशाला की ज़रुरत पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि आज भारत ही नहीं पूरा विश्व दो बड़ी महामारियों से जूझ रहा है, एक है ‘पैंडेमिक’ तो दूसरी है ‘इन्फोडेमिक’ यानि  गलत सूचना की महामारी। गलत सूचना की महामारी पर चिंता जताते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि यह कोरोना महामारी से भी ज़्यादा खतरनाक है। कोई मास्क, सेनेटाइजर या टीका आपको इससे नहीं बचा सकता, इसका सिर्फ एक ही इलाज है और वह है मीडिया लिटरेसी।  यह कार्यशाला इंटर न्यूज़ के तत्वाधान में डाटा लीडस् एवं गूगल न्यूज़ इनिशिएटिव के सहयोग से पूरे भारत में इंडिया मीडिया लिटरेसी नेटवर्क मुहीम के तहत आयोजित की जा रही है। इस कार्यशाला में फैक्टशाला ट्रेनर प्रोफेसर भावना पाठक ने मीडिया लिटरेसी की उपयोगिता के बारे में जानकारी देते हुए फेक न्यूज़ को पहचानने और उससे बचने के उपाय बताये। प्रोफेसर पाठक ने बताया कि सूचना एवं संचार के इस युग में मीडिया साक्षर होना वक़्त की सबसे बड़ी मांग है क्यूंकि मीडिया आज हमारी ज़िन्दगी का अहम् हिस्सा बन गया है जो हमें प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से प्रभावित करता है। मीडिया साक्षर व्यक्ति न केवल ख़बरों को जाँच परखकर उन्हें ग्रहण करता है बल्कि साथ ही वह मीडिया लिटरेसी के ज़रिये अपनी तार्किक क्षमता का विकास कर लोकतंत्र में सक्रिय एवं ज़िम्मेदार नागरिक की भूमिका का भी भलीभांति निर्वाह करता है।

आज हम पर जिस तरह से सूचनाओं की बमबारी हो रही है, एजेंडा, प्रोपगंडा, मत और सूचनाओं की स्पाइसी मिक्स वेज बनाकर हमें जिस ढंग से परोसी जा रही है उसे समझना बेहद ज़रूरी है, और मीडिया लिटरेसी इसमें हमारी मदद करती है। कौन सी खबर हमें किस मीडिया हाउस के द्वारा परोसी जा रही है, उस खबर को हाईलाइट करने के  पीछे उस मीडिया चैनल का क्या उद्देश्य है, उस खबर के ज़रिये हमें क्या बताने की कोशिश की जा रही है,किन ख़बरों को दिखाया और किन ख़बरों को क्यूं दबाया जा रहा है, मुख्य धारा की मीडिया पर किसका कब्ज़ा है और अपने दायित्वों का निर्वाह करने के लिए मीडिया कितना स्वतंत्र है, इन सारे सवालों के तह तक जाकर उनका विश्लेषण करना सिखाती है मीडिया लिटरेसी।

स्मार्टफोन के ज़रिये इंटरनेट का इस्तेमाल करने में भारत दुनिया में दूसरे नम्बर पर है पर डिजिटल और मीडिया साक्षरता में हम बहुत ही पीछे हैं। मीडिया साक्षरता की कमी के कारण ही लोग आये दिन साइबर क्राइम, साइबर फ्रॉड और फेक न्यूज़ का शिकार बन रहे हैं। सोशल मीडिया पर अफवाहों का बाज़ार इसलिए ज़्यादा गरम रहता है क्यूंकि यहाँ किसी भी तरह की कोई गेटकीपिंग नहीं। कोई भी कुछ भी पोस्ट कर सकता है। ऐसे में एक ज़िम्मेदार नागरिक होने के नाते हमारी ये जिम्मेदारी है कि हम ख़बरों को जांचे परखे बगैर बिना सोचे समझे उन्हें दूसरे लोगों को फॉरवर्ड न करें। ज़रूरी नहीं जो चीज़ सोशल मीडिया पर वायरल हो रही हो वो सच हो। सोशल मीडिया की किसी भी सूचना पर तत्काल कोई प्रतिक्रिया देने और उसे दूसरे लोगों को साझा करने से बचें। मीडिया के संदेशों को तर्क की कसौटी पर कसने के बाद ही उस पर यकीन करें। अमित पोखरियाल अध्यक्ष पी आर इस आई देहरादून चैप्टर ने कहा कि मीडिया लिटरेट हुए बगैर हम इस सूचना संचार के युग में सफलतापूर्वक आगे नही बढ़ सकते। जिस तरह राजमार्ग पर गाडी चलाने के अपने कुछ नियम हैं उसी तरह डिजिटल दुनिया के भी अपने नियम और कायदे हैं उन्हें जाने बगैर हम सही अर्थों में ‘नेटीजेन’ नहीं कहलायेंगे। आधी अधूरी जानकारी के साथ डिजिटल दुनिया में कदम रखने पर साइबर अपराधों का शिकार होने का खतरा भी है इसलिए मीडिया लिटरेसी आज के वक़्त में सबसे बड़ी ज़रुरत है और इसके लिए सभी को आगे आना चाहिए।

इस वर्कशॉप की संयोजक प्रोफेसर शिखा मिश्रा ने कहा कि गलत और भ्रामक सूचनाएं उस कैंसर की तरह हैं जिनका जल्द से जल्द इलाज करना ज़रूरी है अन्यथा ये समाज में कई तरह की विसंगतियां पैदा करेगा। इस ट्रेनिंग वर्कशॉप में देश भर के कई वरिष्ठ पत्रकारों, मीडिया विशेषज्ञों एवं मीडिया एजुकेटर्स ने शिरकत की साथ ही पी आर एस आई के देहरादून चैप्टर के साथ साथ इस कार्यशाला में हिमांचल, चेन्नई, हैदराबाद, कोलकाता चैप्टर्स के सदस्यों में भी बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया।

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