दो हिस्सों में बंट गई महाकौशल एक्सप्रेस, 22 यात्री हुए घायल

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उत्तर प्रदेश के महोबा के पास डीरेल हुई महाकौशल एक्सप्रेस के पीछे आतंकी साजिश की आशंका जताई जा रही है. इस बाबत बीजेपी के पूर्व सांसद गयाचरण राजपूत ने जिलाधिकारी अजय सिंह को आगाह भी किया था.

कुछ दिनों पहले ही पूर्व सांसद ने जिलाधिकारी को बताया था कि कुछ आतंकी संगठन रेलवे को निशाना बनाने की साजिश रच रहे हैं. हालांकि उनकी इस सूचना को गंभीरता से नहीं लिया गया.[ads1][ads1]

मिली जानकारी के मुताबिक़ गुरुवार देर रात दो बजे के करीब हुए इस हादसे की वजह रेल की पटरी को काटा जाना है. रेलवे और जिला प्रशासन के आला अधिकारी मौके पर पहुंच गए हैं और जांच में जुटे हैं.

रेलवे के प्रवक्ता अनिल सक्सेना से हुई बातचीत में उन्होंने आतंकी साजिश को नकारा नहीं है, लेकिन कहा कि अभी कुछ भी कहना जल्दबाजी होगी. जांच के बाद ही हादसे की वजहों का पता चल सकेगा.

इस बीच एडीजी लॉ एंड आर्डर दलजीत चौधरी ने बताया कि मौके पर एटीएस और फोरेंसिक टीम को रवाना कर दिया गया है. उन्होंने कहा कि पूरे मामले में डीजीपी मुख्यालय पैनी नजर बनाए हुए है. चौधरी ने बताया कि हादसे की जांच रेलवे पुलिस ही करेगी.

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डीजी रेलवे ने अपराधिक षड़यंत्र से किया इनकार

डीजी रेलवे गोपाल गुप्ता ने कहा कि इस हादसे में किसी भी तरह की अपराधिक षड़यंत्र की संभावना नहीं दिख रही है. उन्होंने कहा कि रेल ट्रैक ख़राब होने की वजह से हादसा हो सकता है. फिलहाल जांच चल रही है.

यूपी लगातार हो रही पटरी काटने की साजिश

पिछले साल 20 नवंबर 2016 को यूपी के कानपुर के पास पुखरायां में बड़ा रेल हादसा हुआ था. इस रेल हादसे में 150 से ज्यादा लोगों की मौत हुई थी जबकि 200 से ज्यादा लोग घायल हो गए थे. इसके बाद जांच में पता चला था कि इस हादसे के पीछे आतंकी साजिश थी.

इसके बाद लखनऊ में मारे गए आईएसआईएस के संदिग्ध आतंकी सैफुल्लाह के पास से बरामद दस्तावेजों से भी पता चला था कि रेलवे आतंकियों के निशाने पर है.

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दरअसल रेलवे आतंकियों के लिए हमेशा से भी सॉफ्ट कार्नर रहा है. इसके बावजूद सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम करने में रेलवे नाकाम रहा है.

अभी मंगलवार को ही संतकबीरनगर में रेलवे ट्रैक पर विस्फोट हुआ था और तीन क्रूड बम भी बरामद हुए थे. इस हादसे में नेपाली मूल का एक शक्श गंभीर रूप से घायल भी हुआ था. इस हादसे में भी आतंकी साजिश की आशंका जताई गई थी. लेकिन जिला प्रशासन ने इससे इनकार किया था.

बुधवार को ही गोरखपुर में पटरी काटने की कोशिश की गई थी, लेकिन समय रहते इसका पता चलने से एल बड़ा हादसा होते-होते रह गया.

यूपी की राजधानी लखनऊ के पास मोहनलालगंज में भी सात बार पटरी काटी गई थी.

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