पहाड़ की बेटी ने पूरी की दुनिया की परिक्रमा, PM ने किया सलाम, रक्षा मंत्री खुद करेंगी स्वागत

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उत्तराखंड की लेफ्टिनेंट कमांडर बेटी वर्तिका जोशी पूरी दुनिया का चक्कर लगा आयी हैं। पिछले साल यानि कि १९ सितम्बर 2017 को यह सफर शुरू हुआ था। पिछले साल पूरी दुनिया का चक्कर लगाने के लिए हिंदुस्तान की 6 बेटियों ने अपना सफर शुरू किया था। ये सफर समंदर की लहरों को चीरते और पूरी दुनिया का चक्कर लगाकर सोमवार को गोवा पंहुचेगा। INVS तारिणी के जरिए भारतीय नौसेना की 6 बेटियों ने ये सफर शुरू किया था। नेवी ऑफिसर्स के इस दल की कमान लेफ्टिनेंट कमांडर वर्तिका जोशी संभाल रही हैं।

वर्तिका जोशी मूल रूप से पौड़ी के धूमाकोट क्षेत्र के स्यालखेत गांव की हैं। वर्तिका के पिता प्रोफेसर पीके जोशी जी हैं, जो कि गढ़वाल विश्वविद्यालय में शिक्षा विभाग में कार्यरत हैं। वर्तिका की मां अल्पना जोशी राजकीय महाविद्यालय ऋषिकेश में हिंदी की विभागाध्यक्ष है। साल 2010 में वर्तिका नौ सेना अधिकारी बनी। वर्तिका इससे पूर्व आईएनएसवी महादेई में भी ऐसा ही अभियान पूरा कर चुकी हैं।

आईएनएसवी तरिणी दुनिया का चक्कर लगाने वाला भारतीय नेवी का पहला ऐसा स्टाफ बन गया है जिसमें केवल महिलाएं हैं। पहली महिला क्रू स्टाफ वाला नौसेना पोत दुनिया की जल यात्रा पूरी करने के बाद सोमवार को वापस वतन लौट जाएगा। गोवा से ही सफर शुरू करने के करीब 8 महीने बाद भारतीय नेवी की महिला क्रू स्टाफ वाला नौसेना पोत आईएनएसवी तरिणी दुनिया की अपनी ऐतिहासिक जल यात्रा पूरी करने के बाद सोमवार को वापस यहां पर लौट रहा है। ‘नाविका सागर परिक्रमा’ के नाम वाली इस खोज यात्रा का नेतृत्व पहाड़ की बेटी लेफ्टिनेंट कमांडर वर्तिका जोशी कर रही हैं और ये पूर्णतया महिला क्रू स्टाफ वाली भारत की तरफ से पृथ्वी की पहली वैश्विक जलयात्रा है। इस यात्रा में वर्तिका जोशी के अलावा क्रू स्टाफ में लेफ्टिनेंट कमांडर प्रतिभा जामवाल और स्वाति पी. और लेफिटनेंट ऐश्वर्या बोदापाती, एस. विजया देवी व पायल गुप्ता शामिल थीं।

उत्तराखंड की बेटी के नेतृत्व में भारत की 6 महिला ऑफिसर्स ने ये खोज यात्रा 6 चरणों में पूरी की, जाबांज बेटियों की इस टीम ने 5 देशों ऑस्ट्रेलिया के फ्रेमांटले, न्यूजीलैंड के लाइटिलटन, फॉल्कलैंड आइसलैंड्स के पोर्ट स्टेनले, दक्षिण अफ्रीका के केप टाउन और मॉरीशस में रास्ते में विश्राम किया। इस दौरान टीम ने इक्वाडोर को दो बार पार किया, जबकि चार महाद्वीपों और तीन समुद्रों को पार किया। साथ ही आईएनएसवी तरिणी दक्षिण में तीन ग्रेट केप्स- लीयूविन, होर्न और गुड होप से भी होकर गुजरी। INVS तारिणी को गोवा के एक्वेरियस शिपयार्ड लिमिटेड में तैयार किया गया है। इसे हॉलैंड के टोन्गा 56 नाम के डिजाइन पर तैयार किया गया है। सूत्रों के मुताबिक इस पूरी टीम को कैप्टन दिलीप डोंडे ने ट्रेनिंग दी है। यहां सबसे ख़ास बात ये है कि कैप्टन दिलीप डोंडे वर्ष 2009-10 में अकेले दुनिया की जलयात्रा करने वाल पहले भारतीय बने थे।

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