देहरादून : प्राइवेट स्कूलों को आखिरी मौका, गरीबों को लूटने का धंधा खुद बंद करें स्कूल: पांडे

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देहरादून : ज्यादा फीस वसूली और अपनी मनमानी को लेकर आए दिन सुर्खियों में आ रहे निजी स्कूलों को सुधरने के लिए शिक्षा मंत्री ने आखिरी मौका दिया है। शिक्षा मंत्री अरविंद पांडे ने साफ चेतावनी दी है कि अगर प्राइवेट स्कूलों ने आम आदमी को लूटना बंद नहीं किया तो अगले शैक्षणिक सत्र से स्कूल प्रबंधन कार्रवाई के लिए तैयार रहे। शिक्षा मंत्री अरविंद पांडे ने दैनिक जागरण- आईनेक्स्ट से खास बातचीत के दौरान प्राइवेट स्कूलों पर नकेल कसने की बात कही और प्राइवेट स्कूलों को शिक्षा के बाजारीकरण रोकने की चेतावनी दी है.[ads1][ads1]

निजी स्कूलों को अल्टीमेटम

सूबे में टीएसआर सरकार के अस्तित्व में आते ही भ्रष्टाचार और मनमानी पर जीरो टॉलरेंस पर सरकार का स्पेशल फोकस है। टीएसआर सरकार का हर मंत्री अपने- अपने विभागों में फैले भ्रष्टाचार के खिलाफ कड़े नियम कानून लागू करने के निर्देश दे रहे हैं। प्रदेश के निजी स्कूलों में चल रही मनमानी और एजुकेशन लॉबी द्वारा चलाए जा रहे शिक्षा के उद्योग को खत्म करने के लिए शिक्षा मंत्री अरविंद पांडेय ने प्राइवेट स्कूलों को सुधरने का अल्टीमेटम दिया है। प्राइवेट स्कूलों की मनमानी रोकने के लिए शिक्षा मंत्री ने स्कूल प्रबंधन को एक मौका देते हुए कहा कि प्रबंधन खुद अपने नियमों को बदलते हुए आम आदमी को राहत दें। अगर स्कूल प्रबंधन ने नियम कानून नहीं बदले तो शिक्षा मंत्री ने नए शैक्षिणक सत्र से कार्रवाई का डंडा चलाने का ऐलान किया है।[ads1][ads1]

इंसानियत न भूलें स्कूल

शिक्षा मंत्री ने कहा कि प्राइवेट स्कूल चलाने वालों को इंसानियत का भी ध्यान रखना चाहिए। सबसे ज्यादा लूट प्राइवेट स्कूलों में चल रही है। गरीब का खून पी कर प्राइवेट स्कूल अपना धंधा चला रहे हैं। इतनी मोटी फीस कोई आम आदमी नहीं दे सकता। प्राइवेट स्कूलों की मनमानी की वजह से आम आदमी अपने बच्चों की किताबें भी नहीं खरीद पा रहा।[ads1][ads1]

अगले सत्र से कड़े होंगे नियम

शिक्षा मंत्री ने शिक्षा के बाजारीकरण पर चिंता जताते हुए कहा कि शिक्षा का बाजारीकरण ठीक नहीं है। उन्होंने कहा कि सख्त से सख्त कानून बनाकर शिक्षा के बाजारीकरण को रोकना होगा। इसलिए एक मौका देना जरूरी है। स्कूल अगर मानवता का ध्यान न रखते हुए मनमानी से बाज नहीं आएंगे तो हम कड़े नियम लागू करेंगे। उन्होंने कहा कि पहले निजी स्कूल अपने स्तर से क्या राहत देते हैं ये देखना होगा, उसके बाद अगले शैक्षणिक सत्र से कड़े नियम बनाए जाएंगे, ताकि हर आम आदमी अपने बच्चों को निजी स्कूलों में पढ़ा सके.

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