केदार घाटी में झूलते हुये तारों के सहारे बंधी है, लोगो के जीवन की डोर !

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रुद्रप्रयाग: केदारनाथ आपदा के कई वर्ष बीत जाने के बाद भी लोग मौत की ट्राली से आवाजाही करने को मजबूर है। कल तीन घंटे तक रूद्रप्रयाग के चंद्रापुरी कस्बे में पंकज जोशी मंदाकिनी नदी के ऊपर ट्राली में फंस गये. जिस कारण 3 घंटे तक पंकज की सांसे अटकी रही। जिसके बाद जिलाधिकारी के सख्त निर्देश और जद्दोजहद के बाद विभागीय अधिकारियों की मौजूदगी में पंकज जोशी को सकुशल ट्राली से उतारा गया। गौरतलब है कि यहां पर ट्राली में दर्जनों घटनाएँ घटित हो चुकी है। पूर्व में एक बच्चे की अंगुलिया भी कट गयी थी तो एक की मृत्यु भी हुई थी। फिर भी विभाग नें इन घटनाओं से कोई सीख नहीं ली। आज भी इन स्थानों पर कार्य कछुवा गति से चल रहा है। गौरतलब है कि केदारनाथ आपदा को चार साल गुजर गये है। लेकिन आज भी आपदा से बहे पुलों की जगह नये पुल नहीं बन पाये। जिस कारण से केदार घाटी के दर्जनों गाँव के लोगो के जीवन की डोर ट्राॅली के झूलते तारों के सहारे बंधी है। ये ट्राॅली मौत की ट्राॅली बनी हुई है लेकिन तंत्र कुमकर्णी नींद में सोया है। चार सालों के दौरान रूद्रप्रयाग जनपद के विजयनगर से लेकर चंद्रापुरी में ट्राली में हुई घटनाओं नें एक बार फिर से तत्र की लचर कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान लगा दिया है। आखिर 4 साल में इन स्थानों पर एक पुल भी नहीं बना पाये। आमजन लाचार और बेबस नजर आ रहा है। जन उम्मीद करें भी तो करें किससे। क्या ये समझा जाय पहाड़ के लोगों को उनके हवाले छोड दिया गया है और यहां की समस्याओं से किसी को कोई लेना देना नहीं। चार साल में तो पूरी नदी में चार चार डबल लेन का पुल तैयार हो जाता है। आखिर क्यों नहीं सुन पा रहे है हुक्मरान अपने अंतरआत्मा की आवाज –?? आखिर कब तक लोगो जिंदगी ट्राॅली के तारों में झूलती रहेगी.

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