जोशीमठ : लामबगड़ भूस्खलन क्षेत्र का विकल्प न तो सरकारें ढूंढ पायी है न प्रशासन

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दशकों से चमोली जनपद के जोशीमठ प्रखंड के अंतर्गत राष्ट्रिय राजमार्ग संख्या 58 ऋषिकेश-बदरीनाथ! लामबगड़ भूस्खलन क्षेत्र का विकल्प न तो सरकारें ढूंढ पायी है न प्रशासन और न ही इस राजमार्ग की जिम्मेदारी रखने वाला, इसका निर्माण करने वाली कार्यदायी इकाई “सीमा सड़क संगठन”! यह राजमार्ग धार्मिक दृष्टि से यहाँ भारत के चार धामों में से एक “बदरीनाथ” और सामरिक दृष्टि से चीन-तिब्बत सीमा बहुत महत्वपूर्ण है। “लामबगड़ भूस्खलन क्षेत्र” बरसात में जानलेवा तो बना ही साथ में सीमा से देश का संपर्क काट देता है। इस मार्ग से सेना के लिए रसद, सड़क निर्माण हेतु मशीनरी, भारी युद्धक हथियार सीमा पर सेना और सीमा सड़क संगठन द्वारा ले जाए जाते है। हर वर्ष देश और विदेशों से आने वाले श्रद्धालु भी इसी मार्ग से बदरीनाथ दर्शन के लिये जान हथेली पर रख कर जाते है। और तो और देश के कई विधायक, मंत्री उच्च अधिकारी भी इसी मार्ग से बद्रीनाथ और सीमा की रेकी के लिए जाते है परंतु दशकों से इस राजमार्ग की दशा ज्यों की त्यों है। वर्तमान में भारत और चीन में मध्य सीमा विवाद को लेकर युद्ध जैसे हालात बने है और सरकारें अपने आप को और सेना को युद्ध के लिए तैयार बता रही है परंतु भारत में ऐसे महत्वपूर्ण राजमार्गों की विकट हालात का न विकल्प है और न मार्ग ठीक है! सरकार की युद्धक तैयारियों की तो यहीं पर असलियत पता चलती है। राजनीतिक ध्रुवीकरण, खरीद- फरोख्त, गुंडई, आरोप-प्रत्यारोप, भ्रष्टाचार के लिए सरकार अपनी ईमानदारी को 24 कैरेट सही मानती है परंतु असलियत से किनारा क्यों! ये किसी एक सरकार की जिम्मेदारी या फिर विफलता नहीं है ये उन सभी सरकारों की जिम्मेदारी और विफलता है जो बारी-बारी से राज्यों और केंद्र में सत्ता में आयी! सेना की तोप और गोलाबारूद वाहनों में लामबगड़ भूस्खलन क्षेत्र में सड़क खुलने का इंतजार कर रही है! देश की सुरक्षा और सीमाओं की रक्षा की अगर किसी को असलियत जाननी है वो स्पष्ट देख सकता है। सरकारें सीमाओं से सटे गांवों और यहाँ रह रहे लोगों की विदेशी आक्रमण के प्रति कितनी संजीदा है साफ़ पता चलता है। संसद में गरजने या फिर सरकारों को अस्थिर करने से न तो देश की आंतरिक सुरक्षा का हल हो सकता है और न वाह्य सुरक्षा हल हो सकती है! भारत की सरकार उस चीन पर आक्रमण करने की बात कर रही है जिसने अपने देश में बीहड़ पहाड़ों पर फोर-लेन सड़क निर्मित कर दी है, उच्च गुणवत्ता की हवाई पट्टी विकसित कर ली और बुलेट ट्रेन पहुंचा दी है और भारत में सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण राजमार्गों पर साईकिल तक नहीं चल सकती ऐसे हालात है!

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