जागो उत्तराखंड फिल्म इंडस्ट्री के लिए सोच बदलने की आवश्यकता हैं, उत्तराखंड फिल्म विकास परिषद का मतलब क्या है ?

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मेरी चिठ्ठी
अफसोस दिनांक ८ अगस्त फिल्म निर्माता/ निर्देशक नरेश खन्ना जी की प्रथम पुण्यतिथि पर उत्तराखंड फिल्मों के वो लोग घौर निन्द्रा म सोये थे.
जो इस इंडस्ट्री को सजाने-संवारने का बोलबच्चन व बडी बडी डैंगे हाँकते रहते हैं
या गढवाळी म बोला त
*भैंकळे बंदूकन चोट करदन*
उन लोगों ने खन्ना जी कि पुण्यतिथि पर याद करने जैसी कोई सभा की सोच न रखी ओर न जरुरी समझा.
और न याद होगा कि जिस नरेश खन्ना ने इस उत्तराखंड फिल्म इंडस्ट्री के लिए अपने प्राणों की आहुति दी
वे ८ अगस्त को इस उत्तराखंड इंडस्ट्री से विदा हो गये थे.
यहाँ तक कि
*उत्तराखंड फिल्म विकास परिषद*
के पदो पर असीन महानुभाव भी भुल गये कि जिन फिल्म महान विभूतियों के वजह बोर्ड मै बैठकर सीना ठोक रहे है
कि..मैं ये हुं.. मै वो हुं.. वह भी नरेश खन्ना जी के बलिदान को नहीं समझ पाये.
मै एक बात पुछना चाहता हुं
कि उत्तराखंड फिल्म विकास परिषद का मतलब क्या है ?
*किसके विकास के लिए यह गठन हुआ ?*
*किसके संरछ्ण के लिए बोर्ड का गठन हुआ ?*
*महानुभावो जागो उत्तराखंड फिल्म इंडस्ट्री के लिए सोच बदलने की आवश्यकता हैं.*
*कुछ कर दिखाने का वक्त है.*
*सरकार ने फिर मौका दिया उसको मत चुको.*
*वरना फिर नौ साल जैसी स्थिति मै खडे हो जाओगे.*
*यहां फिल्म, फिल्महाॅल. निर्माता.निर्देशक. कलाकार. तक निशियन सब असुरछित है.*
कुछ कर लो…..कखी इन हो
*”सौंण मरि बल सासु, भादों आया आँसु”*
काश उत्तराखंड फिल्म विकास परिषद नरेश खन्ना जी कि कोई फिल्म देहरादून के सनेमा हाॅल मै लगाकर पुरि उत्तराखंड फिल्म इंडस्ट्री के लोगों को बुलाकर श्रदांजलि देते
तो इस इंडस्ट्री की एकता अखंडता के साथ इस इंडस्ट्री मैं कार्यरत करने वोलो का मनोबल बढता.
*बलदेव राणा*
फिल्म अभिनेता रंगमंच निर्देशक
 

 

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