कहते हैं पंखो से नहीं बुलंद इरादों से उड़ान भरी जाती है

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कहते हैं पंखो से नहीं बुलंद इरादों से उड़ान भरी जाती है ,यह बात बिना हाथ के एक बच्चे के बुलंद होसले को देखकर साफ़ हो जाती है , क्योकि दिव्यांगता मन से होती है तन से नहीं ,अगर आपमें जज्बा हो तो दिव्यांगता अभिशाप नहीं हो सकती ,इसकी बानगी देखी जा सकती है ,चमोली जनपद के दुरस्थ सरकारी इंटर कालेज सितेल में | कक्षा 9 में अध्यनरत एक बच्चे के कारनामे लोगो को दांतों तले अंगुली दबाने को मजबूर कर देते है|क्योकि 15 वर्ष का यहाँ बच्चा पांव से लिखता है और नाक से कंप्यूटर के कीबोर्ड में टाईपिंग करता है ,इसके वावजूद अपने इंटर कालेज में टापर छात्र भी है कुलदीप |

खेलने की उम्र में अगर खेलने के लिए हाथ ही न हो तो जिंदगी बोझ बन जाती है ,बात की जा रही है सितेल इंटर कालेज के होनहार छात्र कुलदीप की ,7 वर्ष की छोटी सी उम्र में दोस्तों के साथ खलते हुए बिजली का तार खम्बे से टूटकर कुलदीप पर गिरने से कुलदीप बुरी तरह से झुलस गया था,जिसके बाद कुलदीप के परिजन उपचार के लिए कुलदीप को बेस अस्पताल श्रीनगर ले गए ,लेकिन प्राथमिक उपचार के बाद डाक्टरों ने बेस अस्पताल में संसाधनों की कमी के चलते कुलदीप के परिजनों को बेहतर इलाज के लिए चंडीगढ़ ले जाने की बात कही ,लेकिन कुलदीप के परिजनों ने आर्थिकी सही न होने के कारण चंडीगढ़ जाने में असमर्थता जता दी ,जिसके बाद श्रीनगर बेस अस्पताल में ही कुलदीप का उपचार चलने लगा ,करंट के चपेट में आने से उपचार के दौरान कुलदीप के दोनों हाथो को कुहनी से नीचे काटना पडा,तीन माह तक बेस अस्पताल में रहने के बाद कुलदीप को परिजन घर लाये ,लेकिन बच्चे के हाथ न होने से कुलदीप के भविष्य को लेकर परिजन भी मायूस रहने लगे ,लेकिन इसी बीच कुलदीप ने अपने पिता से स्कूल जाकर अपनी कक्षा में अपने दोस्तों के साथ पढ़ने की इच्छा जाहिर कर दी ,पिता ने बुझे दिल से कुलदीप को स्कूल तो भेज दिया लेकिन कुलदीप के भविष्य को लेकर चिंता सताती रही ,लेकिन कुलदीप ने अपने मन में कुछ ऐसा करने की ठान ली थी जिससे की किसी को भी दिव्यांग होने पर अपने आप पर घृणा महसूस न हो| कुलदीप से भविष्य के बारे में पूछा गया तो कुलदीप ने कहा की में सिविल सेवा में जाना चाहता हूँ ,जिससे की में अपने जैसे दिवियांगो की मदद के लिए आगे आ सकू|

कुलदीप ने हाथ न होने के वाबजूद भी पढ़ाई से ही अपना नया सफ़र शुरु किया ,कुलदीप ने घर पर ही कटी हुई कुहनीयो और पाँव से लिखने का अभ्यास किया ,जिसमे की कुछ माह के बाद ही कुलदीप पाँव से लिखने में परिपूर्ण हो गया ,अब कुलदीप का ध्यान पढ़ाई पर ही था जिसके बाद अपनी प्राईमरी स्कूल में कुलदीप ने हर क्लास से लेकर पांचवी क्लास तक प्रथम स्थान ही प्राप्त किया ,कुलदीप के शिक्षक और सहपाठी बताते है की पढ़ाई के साथ –साथ कुलदीप कबड्डी ,बालीवाल ,बेटमेंटन ,के साथ ही केरमबोर्ड भी अच्छा खेल लेता है |और यही नही कुलदीप हर वर्ष अपने इंटर कालेज में सर्वोच्च अंक प्राप्त करने वाला छात्र भी है |

कुलदीप के प्रधानाचार्य का कहना है की कुलदीप हमारे इंटर कालेज का मेंधावी छात्र है ,और हमे लगता ही नहीं की कुलदीप के हाथ नहीं है ,पाँव से लिखने के वाबजूद भी उसका लेख स्पष्ट और सुन्दर है ,और कुलदीप से हम सामान्य बच्चो की तरह व्यवाहार करते है, और गलत काम करने पर दण्डित भी करते है जिससे की कुलदीप को अपनी दिव्यांगता का अहसास न हो | कुलदीप के परिवार की आर्थिकी ठीक नहीं होने के कारण  भविष्य में आगे की सरकारी मदद की  

वहीँ प्रधानाचार्य राजकीय इंटर कालेज सितेल दिगम्बर सिंह का कहना है की आज भी समाज में कई ऐसे कुलदीप है जिन्होंने की शारीरिक कमजोरी के चलते हिम्मत हार ली है लेकिन उन्हें इस कार्यक्रम को देखने के बाद सीख लेनी चाहिए की इरादे मजबूत हो तो कामयाबी पीछे खुद भागती है|    

 

 

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