सैलानियों से गुलज़ार हुआ देश का अंतिम सरहदी गाँव “माणा”

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सैलानियों और यात्रियों से गुलज़ार हुआ देश का अंतिम सरहदी गाँव “माणा”.ब्रह्म मुहूर्त पर आगामी 6 महीनो के लिए बैकुंठ धाम भगवान बद्रीविशाल के कपाट खुलने के बाद, बद्रीनाथ से 3 किमी० आगे समुन्द्र तल से 18,000 फुट की ऊँचाई पर बसा भारत का अंतिम गाँव माणा भी सैलानियों और यात्रियों से गुलज़ार हो गया हैं. बद्रीनाथ के दर्शन करने के बाद अधिकतर लोग माणा गाँव पहुँच रहे हैं.

भारत-तिब्बत सीमा से लगे इस गाँव कि सांस्कृतिक विरासत तो महत्तवपूर्ण हैं ही, साथ ही यह अपनी अनूठी परम्पराओं के लिए भी काफी मशहूर हैं. यहाँ अधिकतर भोटिया जनजाति के लोग रहते हैं. आपको बता दे कि माणा गाँव की आबादी 400 के करीब हैं. यह पूरा इलाका सालभर ठंडा रहता हैं और यहाँ की मिट्टी आलू की खेती के लिए सबसे बेहतर मानी जाती हैं. जौ और थापर भी अन्य प्रमुख फसलो में से एक हैं. इसके अलावा यहाँ भोजपत्र भी बड़ी संख्या में पाए जाते हैं.

माणा गाँव में कई दर्शनीय स्थल भी हैं. अगर आप भी बद्रीनाथ जा रहे हैं तो ज़रूर जाईए देश के अंतिम सरहदी गाँव “माणा”.

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