थाईलैंड में मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने निवेशकों को क्या कुछ कहा, पढ़ें पूरी खबर….

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मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र ने संगोष्ठी को संबोधित करते हुए कहा कि भारत दुनिया की तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था में से एक है और विश्व के शीर्ष तीन निवेश स्थलों में शामिल है। भारत में ब्राण्डेड भोजन की बढ़ती मांग वाले 1.32 बिलियन उपभोक्ता हैं। यहां विश्व स्तरीय बन्दरगाहों की उपलब्धता के साथ ही खाद्य और रसद की आपूर्ति श्रृंखला की बुनियादी सुविधाएं भी मौजूद हैं।

थाईलैंड के उद्योगपतियों से बातचीत करते सीएम।

मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत दूसरा सबसे बड़ा कृषि योग्य क्षेत्र है। जिसमें 127 विविध कृषि जलवायु वाले क्षेत्र उपलब्ध हैं। जो हमें कई फसलों केला, आम, अमरूद, पपीता और भिण्डी में वैश्विक नेतृत्व प्रदान करता है। भारत का चावल, गेहूं, मछली, फलों और सब्जियों के उत्पादन में विश्व स्तर पर दूसरा स्थान है। जबकि भारत दुनिया का सबसे बड़ा दुग्ध उत्पादक देश है। हमारे बागवानी क्षेत्र ने पिछले 10 वर्षो में 5.50 प्रतिशत की औसत वार्षिक वृद्धि दर्ज की है।

निवेश को लेकर बिजनेसमैन्स से सीएम ने की वार्ता।

मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत एक सबसे बड़े खाद्य उत्पादक देश होने के बावजूद भी यहां कुल उत्पादन का मात्र 10 प्रतिशत ही मूल्य संवर्धन और प्रसंस्करण में उपयोग किया जाता है। जबकि अन्य दक्षिण-पूर्वी एशियाई देशों थाईलैण्ड, मलेशिया, वियतनाम  जैसे देशों में ये 70 से 80 प्रतिशत है। भारत सरकार ने इस प्रसंस्करण एवं मूल्य संवर्धन के उपयोग के प्रतिशत को वर्ष 2019 तक 20 प्रतिशत तक बढ़ाने के लिये कई कदम उठाये हैं और इसके लिए योजनाएं तैयार की गयी हैं।

निवेश की संभावना पर आधारित संगोष्ठी में सीएम।

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र ने कहा कि उत्तराखण्ड प्रमुख निवेश गन्तव्य के रूप में उभर रहा है। यहां जीवन्त उत्पादक औद्योगिक पारिस्थितिकी तन्त्र उपलब्ध है तथा निवेश अनुकूल नीतियां, उत्कृष्ट जलवायु और सामाजिक बुनियादी सुविधाओं के कारण उत्तराखण्ड निवेश के लिये प्रमुख स्थलों में से एक है। उद्योगों की स्थापना के लिए ‘एकल खिड़की व्यवस्था’ के माध्यम से समयबद्व और कठिनाई मुक्त सेवायें उपलब्ध हैं। उत्तराखण्ड में औद्योगिक विद्युत दरें भारत के अन्य राज्यों की तुलना में सबसे कम हैं। विकसित स्थलों पर भूमि की पर्याप्त उपलब्धता, नीतियों के साथ-साथ राज्य का ऐतिहासिक औद्योगिक सद्भाव एवं उत्कृष्ट कानून व्यवस्था ने इसे औद्योगिकी के लिये अनुकूल परिस्थिति प्रदान की है.

उत्तराखण्ड में खाद्य प्रसंस्करण को विशेष क्षेत्र के रूप में चिन्हित किया गया है। उत्तराखण्ड हिमालयी क्षेत्र में स्थित है जिसे वरदान स्वरूप विविध कृषि जलवायु प्राप्त है। जहां सामान्य रूप से जैविक खेती की जाती है। राज्य में खाद्य प्रसंस्करण उद्योगों की स्थापना को बेहतर वातावरण प्रदान किये जाने के लिए राज्य सरकार ने विभिन्न नीतियां, योजनाएं एवं सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। प्रदेश में अपेक्षित एवं विकसित अवस्थापना सुविधाओं युक्त 2 मेगा फूडपार्क, 4 औद्योगिक संकुल, पर्याप्त श्रमशक्ति के साथ-साथ स्थिर राजनैतिक वातावरण विद्यमान है।

उन्होंने आशा व्यक्त की, कि हमारे प्रतिनिधियों और थाईलैण्ड के उद्योगपतियों के मध्य हुए विचार-विमर्श से नई सशक्त साझेदारी विकसित होगी। जो कि दोनों ही देशों के लिये लाभकारी होगी। मुख्यमंत्री ने बैंकॉक के औद्योगिक आस्थानों नवा नकॉर्न इंडस्ट्रियल एस्टेट का भी भ्रमण किया। नवा नकॉर्न पब्लिक कम्पनी के सी.ई.ओ./एम.डी निपित अरूनवोनजस ने आयुध्य सहित अन्य उद्यमियों से भी उत्तराखण्ड में निवेश के सम्बन्ध में विचार-विमर्श किया।

उत्तराखण्ड में खाद्य प्रसंस्करण के क्षेत्र में निवेश की सम्भावनाओं से सम्बंधित संगोष्ठी में सचिव कृषि डी.सेंथिल पाण्डियन ने राज्य में खाद्य प्रसंस्करण की सम्भावनाओं पर प्रभावी प्रस्तुतीकरण भी दिया। थाइलैण्ड में भारत के राजदूत  भगवंत सिंह विश्नोई, मुख्य सचिव उत्पल कुमार सिंह, प्रमुख सचिव मनीषा पंवार, सचिव दिलीप जावलकर, इन्वेस्ट इंडिया की वायस प्रेसिडेन्ट प्रिया रावत, मुख्यमंत्री के औद्योगिक सलाहकार के.एस. पंवार सहित थाईलैंण्ड एवं उत्तराखण्ड के अधिकारी एवं निवेशक उपस्थित रहे।

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