टिहरी के बटखेम गाँव में बसा हैं “माँ कालिंका” का चमत्कारी मंदिर

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टिहरी के बटखेम गाँव में माँ कालिंका का मंदिर चमत्कार के लिए चर्चाओं में हैं. यह चमत्कार ही हैं कि यहाँ माँ काली की डोली भक्तों की मनोकामना को दीवार पर लिखती हैं. इससे बड़ा आश्चर्य यह हैं कि देवी का पश्र्वा अपने हाथों पर सूखे चावलों को भिगोकर हरियाली में बदल देता हैं.

ऐसी मान्यता हैं कि माता के दर पर आने वाले कई निसंतान दंपति को संतान का सुख मिला हैं. देश से ही नहीं बल्कि विदेशो में रहने वाले एनआरआई भी माता के दरबार में आते हैं. नई टिहरी से 5 कि०मी० दूर 57 परिवारों वाले बटखेम गाँव में माँ कालिंका का भव्य मंदिर हैं. यहाँ दूर-दराज के इलाको से लोग परेशानिया लेकर पहुँचते हैं.

हर रविवार को मंदिर परिसर में पूजा अर्चना होती हैं. माता की डोली आवाहन कर भक्त को अपने पास बुलाती हैं. इसके बाद अपने छत्र से दीवार पर उसकी समस्या और उसका समाधान लिखा जाता हैं. प्रत्यक्षदर्शियो के अनुसार देवी के पश्र्वा पर जब थाली से एक मुट्ठी चावल लेता हैं, और पानी से भीगोकर उसी समय हाथ पर हरीयाली तैयार करके दिखता हैं. यहाँ उत्तराखंड के साथ दिल्ली, मुंबई, राजस्थान, से भी श्रद्धालु पहुँचते हैं.

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