सरकारी शिक्षा प्रणाली पर छात्रा के इस सवाल ने मुख्यमंत्री को कैसे कराया चुप ?

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प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने बुधवार को सचिवालय में वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से प्रदेश के लगभग 2500 छात्र-छात्राओं से सीधा संवाद किया। ‘‘भारत छोड़ो आंदोलन‘‘ की 75वीं वर्षगांठ के अवसर पर जन संवाद की श्रृंखला प्रारंभ करते हुए मुख्यमंत्री ने छात्र-छात्राओं से प्रदेश एवं देश के विकास में बढ़ चढ़ कर योगदान करने का आह्वान किया।

मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर सभी बच्चों को स्वच्छता, जलसंचय, वृक्षारोपण, नशा मुक्ति एवं नशे के विरोध तथा भ्रष्टाचार की समाप्ति का संकल्प भी दिलवाया। को एक छात्रा ने प्रदेश में सरकारी शिक्षा प्रणाली पर मुख्यमंत्री से सवाल क्या किया कि मुख्यमंत्री कुछ देर के लिए चुप ही हो गये। हरिद्वार की सिमरन नाम की छात्रा ने सीएम से सरकारी स्कूलों को भी प्राइवेट स्कूलों की तरह बनाने की मांग करते हुए सरकारी स्कूलों के बच्चों का प्रतिभा न होने के चलते खेल और भाषा में उनसे पिछे होने का दर्द भी बयां किया। सिमरन के इस मासूम से लेकिन गंभीर सवाल पर मुख्यमंत्री एक बार तो कुछ देर के लिए रुक कर भावुक हो गये थे। हांलाकि मुख्यमंत्री ने उस छात्रा के सवाल का जवाब दिया लेकिन मासूम सी छात्रा का यह सवाल कई मायनों में प्रदेश में सरकारी शिक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़ा करने वाला हैं। दरअसल मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने भारत छोड़ो आंदोलन की 75 वीं वर्षगांठ पर प्रदेश के छात्रों के साथ सीधा संवाद स्थापित करने के दौरान हरिद्वार के छात्र—छात्राओं से संवाद कर रहे थे। सभी जनपदों से जिलाधिकारियों की उपस्थिति में छात्रों ने वीडियो काॅफ्रेंसिंग के माध्यम से मुख्यमंत्री से सवाल पूछे।

राजकीय इंटर काॅलेज भेल की कक्षा बारह की छात्रा सिमरन ने मुख्यमंत्री से सवाल पूछा कि छात्रों व उनके माता-पिता सरकारी स्कूलों में अपने बच्चों को पढ़ाना नहीं चाहते। सभी चाहते हैं कि उनका बच्चा प्राइवेट स्कूल में पढ़े। प्राइवेट स्कूलों की तुलना में सरकारी स्कूलों के छात्र प्रतिभावान होने के बाद भी भाषा, खेल में पिछड़ जाते हैं। सिमरन ने कहा कि सर सरकारी स्कूलों को ऐसा बना दीजिए कि प्राइवेट स्कूल वालों से भी आगे निकल जायें।

मुख्यमंत्री सिमरन के इस मासूम लेकिन बहुत ही ज्वलंत प्रश्न पर न केवल भावुक हो गये बल्कि कुछ देर रूकते हुए उन्हेाने माना कि उनके लिए यह प्रश्न बड़ा ही महत्वपूर्ण और कठिन है। मुख्यमंत्री ने जवाब देते हुए कहा कि सरकारी स्कूलों में आने वाले शिक्षकों की अर्हता, योग्यता, नियुक्ति प्रक्रिया कठिन होती है, बहुत ही योग्य शिक्षकों का चयन सरकारी विद्यालयों में हो पाता है। सभी योग्य शिक्षक सरकारी विद्यालयों में नौकरी करना चाहते हैं क्योंकि सरकारी विद्यालयों में शिक्षकों को वेतन भी बहुत अच्छा मिलता है। फिर भी अगर वह सर्वश्रेष्ठ शिक्षक एक श्रेष्ठ व्यक्ति की तरह अपने छात्रों को नहीं पढ़ाता उन पर ध्यान नहीं देता तो सरकार द्वारा बनायी गयी आधुनिक बिल्डिंग, सुविधायें योजनायें सब व्यर्थ चले जाते हैं। इसलिए सरकारी विद्यालयों को निजी विद्यालयों की तुलना में बेहतर बनाने के लिए सबसे जरूरी है कि शिक्षक छात्रों और अपने पेशे के प्रति समर्पणभाव से कार्य करंे।
रोशनाबाद कलेक्ट्रट स्थित वीसी रूम में जिलाधिकारी दीपक रावत स्थानीय विद्यालयों के छात्रों के साथ मुख्यमंत्री से रूबरू हुए। भारत छोड़ो आंदोलन (अगस्त क्रांति) के अवसर पर मुख्यमंत्री ने प्रदेश के छात्रों को देश और प्रदेश का भविष्य बताते हुए कहा कि उस समय देश को अंग्रेजो से आजादी की जरूरती थी और आज भारत व प्रदेश सरकार समाज को नशा, भ्रष्टाचार, जाति व्यवस्था, उंच-नीच से मुक्त कराने के लिए आंदोलनरत है। जब तक हमारे प्रदेश से ये सभी कुप्रथायें समाप्त नहीं हो जाती हमारे युवा इन रूढ़ियों से मुक्त नहीं हो जाते तब तक हम रूकने वाले नहीं। उन्होंने बच्चों से कहा कि आप आज के युवा हैं भला बुरा सब समझते हैं, आप जानते हैं कि देश को आगे ले जाने के लिए हमें स्वयं से शुरूआत करनी होगी। इसलिए आज सभी छात्रों से ये संकल्प लेने का आह्वान करता हूं कि आप सब स्वच्छ भारत अभियान में अपना योगदान देंगे, अपने आस-पास घर और बाहर कहीं गंदगी न तो फैलायेंगे न ही दूसरों को फैलाने देंगे। पानी का संरक्षण करेंगे और अपने परिजन, पड़ोसी तथा रिश्तेदारों को भी इसके लिए प्रेरित करेंगे। पानी को बर्बाद होने नहीं देंगे। सभी छात्र एक वृक्ष अवश्य लगायेंगे। तेजी से बढ़ रहे नशे की आदतों से दूर रहेंगे, जीवन में कभी किसी प्रकार का नशा नहीं करेंगे और दूसरों को भी इससे बचायेंगे। अंत में मुख्यमंत्री ने सभी छात्रों से भ्रष्टाचार न करने और न ही भ्रष्टाचार सहने का संकल्प लिया।

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