डेंगू और मलेरिया का रामबाण इलाज : इन पौधों में मिला डेंगू और मलेरिया की बीमारी का इलाज

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देहरादून: प्रकृति अगर किसी समस्या को जन्म देती है तो समाधान भी प्रकृति में ही निहित होता है। राजधानी दून में ऐसी ही एक बड़ी समस्या है डेंगू व मलेरिया। इन रोगों को जन्म देने वाले मच्छर हर साल हजारों लोगों को अपनी चपेट में ले लेते हैं। अब तक मच्छरों को दूर भगाने के लिए सामान्य रूप से गेंदे के फूल के पौधों को ही रामबाण उपाय माना जाता था। मगर, डीबीएस पीजी कॉलेज के बॉटनी विभाग के ताजा शोध में लोवेंडुला व कैटनिप पौधों के नाम भी शामिल हो गए हैं। [ads1][ads1]

शोध की खासियत को देखते हुए राष्ट्रमंडल वानिकी सम्मेलन में भी इसे जगह दी गई है और अब इसका प्रस्तुतीकरण किया जाएगा। डीबीएस पीजी कॉलेज की बॉटनी विभाग की असिस्टेंट प्रोफेसर निर्मला कोरंगा के मुताबिक ये दोनों पौधे दून घाटी के ऊंचाई वाले वन क्षेत्रों में पाए जाते हैं। 

पौधों की विशेष गंध और इनके आसपास मच्छरों के न पाए जाने पर इन पौधों के पत्तों के रस से विभिन्न घरों में परीक्षण भी किया गया। नतीजे आशाजनक रहे और लोवेंडुला और कैटनिप की गंध से मच्छर दूर भागते दिखे। इसके अलावा मच्छरों को दूर भगाने के लिए पारंपरिक रूप से मान्य तुलसी, लेमन ग्रास, नील व यूकेलिप्टस के पत्तों का भी परीक्षण किया गया। इन सभी के पत्तों के रस का छिड़काव करने पर भी यही नतीजे सामने आए।[ads1][ads1]

शोध के दौरान निर्मला कोरंगा ने पाया कि कैटनिप पौधों से मच्छर भगाने का सहज ज्ञान जानवरों को है। उन्होंने बताया कि मच्छरों को दूर रखने के लिए वन्य जीव इनसे लिपटते देखे गए। इससे उन्हें मच्छरों के हमले से राहत मिलती है।

निर्मला कोरंगा के अनुसार दून में पाए जाने मच्छररोधी पौधों के व्यवसायीकरण से एंटी मॉसक्यूटो (मच्छररोधी) कॉइल, क्रीम या इलेक्ट्रॉनिक तकनीक वाले मच्छर मार तैयार किए जा सकते हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि राष्ट्रमंडल वानिकी सम्मेलन के माध्यम से इस खोज का लाभ दुनियाभर के देश उठा सकते हैं। 

इस समय मच्छरजनित रोगों से विश्व के करीब 100 देश जूझ रहे हैं। सम्मेलन में जरिये ये तमाम देश अपने यहां तक लोवेंडुला व कैटनिप पौधों की खोज कर सकते हैं।

 

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