विधायक के फेसबुक वाल से, मेरा बेटा ड्राइवर जो जॉली ग्रांट हवाई अड्डे से उन्हें अपनी जीप में लाता है !

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उत्तराखंड में गावों का लगातार हो रहा पलायन
गावों का पलायन

RUDRPRYAG रुद्रप्रयाग जिले के ऊखीमठ उपखंड में एक गाँव है – मक्कू मठ. तृतीय केदार तुंगनाथ जी का शीतकालीन स्थान. यंहा रहते हैं देश के प्रमुख पक्षी प्रेमी ( Bird watcher) यशपाल नेगी.  आम पहाड़ी आदमी की तरह लगने वाले नेगी मिलते ही अपने मॉडल के बारे में बताते हैं “मैं गाइड हूं जो 4- 5 दिन पक्षी प्रेमियों को घुमाता हूं . मेरा बेटा ड्राइवर जो जॉली ग्रांट हवाई अड्डे से उन्हें अपनी जीप में लाता है ओर मेरी पत्नी कुक है जो अपने घर के 3 कमरों में ठहर रहे पक्षी प्रेमियों के खाने और रहने की व्यवस्था करती है”. यशपाल  आगे बताते हैं- एक पैसा बाहर नही जाता.  जरूरत पड़ने पर हम गाँव के युवाओं को भी काम देते हैं. यशपाल 2013 की आपदा से पहले काकड़ागाड़ में अपना बर्ड वाचिंग सेंटर BIRD WATCHING CENTER चलाते थे. सेंटर के आपदा में बहने के बाद उन्होंने अपने पैतृक गाँव मक्कू में ही आने वाले बर्ड वॉचर के लिए घर पर ही होम स्टे खोला है. जो बरसात के अलावा साल भर भरा रहता है. “मैंने बात कर अंदाज लगा लिया कि, साल में 3 लोगों वाला ये पूरा परिवार मिल कर हैदराबाद के 2 सॉफ्टवेयर इंजीनियरओं से अच्छा कमा लेता होगा. एक शांत और शानदार अच्छी जिंदगी अलग से जीते हैं.” मैं उन्हें सालों से जानता हूं. आपदा से पहले भी उन पर कही संकट आये. उनकी पत्नी बताती हैं – “भैजी आधा किलो चावल ले कर बच्चों को खिला और खेत का काम करके 10 किलोमीटर नीचे काकड़ा गाड़ जाती थी इन्हें मदद करने. पर यशपाल भाई ने पहाड़ नही छोड़ा”.

बर्ड वाचर यशपाल के साथ विधायक मनोज रावत और माउंटेनियर मंजुल रावत

12000 पक्षियों के विशेषज्ञ हैं यशपाल 

2000 से पहले यशपाल नेगी , पंचकेदार ट्रेक गाइड का काम करते थे. 2000 में उन्होंने कॉर्बेट नेशनल पार्क (Corbet National Park ) से 7 दिन के नेचर गाइड ( Nature Guide ) का कोर्स किया. यंही सी उनके जीने का नजरिया बदल गया. आज वे देश में पक्षियों की पाई जाने वाली कुल 1200 प्रजातियों में से उत्तराखंड की 650 में से इस क्षेत्र  की 300 प्रजातियों के विशेषज्ञ हैं. जिनमें से कुछ यूरोप और देश के अलग अलग हिस्सों से प्रवास पर उत्तराखंड आती हैं. वे हिमालयी Pheasant वर्ग की पक्षियों –मोनाल,कोकलाश, हिल पैंतीस ओर रेड फोजंट के तो विशेषज्ञ हैं. इसी कारण देश के सर्वश्रेष्ठ पक्षी प्रेमियों (Bird Lover) में से आधे उनके पास आकर रुक चुके हैं. वे आने वाली परेशानियों से भागे नही , बल्कि उन्होंने अपने गाँव के पास उपलब्ध प्रकृति को शौक ओर आजीवका का साधन बनाया. जो उत्तराखंड के लाखों युवाओं को प्रेरणा दे सकता है. उत्तराखंड को पलायन आयोग की कभी न आने वाली रिपोर्ट के बजाए, यशपाल भी जैसे रोल मॉडलों से कुछ सीखना चाहिए.

केदारनाथ विधायक और वरिष्ठ पत्रकार मनोज रावत के फेसबुक वाल से

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