आपदा के चार साल बाद भी बदहाल हालत में है अलकंनदा व मंदाकिनी का संगम स्थल 

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आपदा के चार साल बाद भी बदहाल हालत में है अलकंनदा व मंदाकिनी का संगम स्थल

सुरक्षा रैलिंग न होने से बना है श्रद्धालुओं को खतरा, घाट निर्माण में भी की जा रही देरी

बद्री-केदार यात्रा के मुख्य पड़ाव रुद्रप्रयाग स्थित संगम स्थल बदहाल स्थिति में है। अलकंनदा व मंदाकिनी के संगम स्थल में आपदा के चार साल बाद भी सुरक्षा रैलिंग नहीं लगाई गई है, जबकि नमामि गंगे के तहत किये जा रहे घाट निर्माण में भी देरी की जा रही है। ऐसे में तीर्थयात्रियों को भारी परेशानियों से जूझना पड़ रहा है।

दरअसल, जून 2013 की आपदा में संगम स्थल क्षतिग्रस्त हो गया था और नारद शिला भी मलबे में दब गई थी। इसके साथ ही नदी का उफान बढ़ने से संगम की सुंदरता पर दाग लग गया। ऐसे में श्रद्धालुओं को संगम स्थल पानी चढ़ाने और सांय काल आरती करने में काफी दिक्कतें हो रही हैं। आपदा को पूरे चार साल का समय गुजर चुका है, लेकिन आज तक संगम के पुनर्निर्माण को लेकर कोई ठोस कदम नहीं उठाये गये हैं। यहां तक की नारदशिला के मलबे में दब जाने के बाद भी नारदशिला के ऊपर पड़े मलबे को हटाया नहीं गया। मंदाकिनी का जल स्तर बढ़ने के बाद अचानक से नारदशिला के ऊपर से मलबा साफ हो गया। मगर अभी भी संगम स्थल पर सबसे बड़ी समस्या सुरक्षा रैलिंग और घाट की बनी हुई है। नगर पालिका की ओर से यहां पर कोई भी सुरक्षा के इंतजाम नहीं किये जा रहे हैं, जबकि नमामि गंगे के तहत चल रहे घाट निर्माण में भी तेजी नहीं दिखाई दे रहे हैं। ऐसे में तीर्थयात्रियों को जान जोखिम में डालकर संगम स्थल पर पानी चढ़ाने के साथ स्नान करना पड़ रहा है।

वहीं जिलाधिकारी मंगेश घिल्डियाल भी मानते हैं कि संगम स्थल पर खतरा बना हुआ है। उन्होंने कहा कि पिछले वर्ष घाटों का निर्माण हुआ था, जो नदी में बह गये। अब नमामि गंगे के तहत घाट का निर्माण किया जा रहा है। कार्यदायी संस्था को कार्य में तेजी लागने को कहा गया है। नदी के एक तरफ मलबा इकट्टा होने से मंदिर को भी खतरा बना हुआ है। इस वर्ष संगम स्थल पर अधिक कार्य किया जायेगा और सुरक्षा के साथ ही घाटों का सौन्दर्यीकरण भी करवाया जायेगा।

हर वर्ष देश-विदेश से लाखों की संख्या में तीर्थयात्री संगम स्थल पहुंचते हैं, लेकिन उनमें आपदा के बाद से मायूसी देखने को मिल रही है। आपदा के बाद घाट का निर्माण किया गया था, जिसमें गुणवत्ता का ध्यान नहीं रखा गया और पहली ही बरसात में वह बह गया। अब नमामि गंगे के तहत कार्य किये जा रहे हैं, जिसमें ठेकेदार और कार्यदायी संस्था की मिलीभगत सामने आ रही है। निर्माण कार्य में अनदेखी किये जाने से स्थानीय जनता में मायूसी है। अब देखने वाली बात यह होगी कि तीर्थयात्रियों और स्थानीय जनता को कब तक सुविधाएं मिल पाती हैं।

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