पिछले तीन दशकों से बदरीकाश्रम ज्योतिषपीठ के संकराचार्य पद को लेकर बहस ओर तल्ख

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    • पिछले तीन दशकों से बदरीकाश्रम ज्योतिषपीठ के संकराचार्य पद को लेकर बहस ओर तल्ख

    पिछले तीन दशकों से बदरीकाश्रम ज्योतिषपीठ के संकराचार्य पद को लेकर स्वामी वासुदेवानन्द सरस्वती एवं स्वामी स्वरूपानन्द सरस्वती के बीच चली आ रही बहस ओर तल्ख हो गई है। जोशीमठ पहुंचे शंकराचार्य बासुदेवानन्द सरस्वती ने कहा कि स्वरूपानन्द जोशीमठ ज्योतिषपीठ एवं द्वारिका सारदा पीठ में से कहीं के शंकराचार्य नही हैं। आपको बता दें कि जोशीमठ के असील शंकराचार्य कौन है इसे लेकर वर्षों से स्वामी वासुदेवानन्द सरस्वती एवं स्वरूपानन्द सरस्वती के बीच तनातनी जारी हैं। वासुदेवानन्द सरस्वती जहां अतिप्राचीन मठ एवं गद्दी में विराजमान हैं तो वहीं इस मठ से कुछ ही दूरी पर वासुदेवानन्द सरस्वती का भी भव्य मठ स्थित है। दो सप्ताह पूर्व शंकराचार्य स्वरूपानन्द सरस्वती के शिष्य अविमुक्तेश्वरानन्द सरस्वती ने प्राचीन पूर्णागिरी मंदिर में यह कहकर चार दिनों तक अंशन किया था कि वहां पर सनातन धर्म के अनुसार पूजायें नही हो रही है। विवाद थमने के कुछ ही दिनों बाद शंकराचार्य वासुदेवानन्द सरस्वती पुनः जोशीमठ आये और वे अब शंकराचार्य स्वरूपानन्द सरस्वती पर हमलावर हो गए हैं। उन्होंने शंरकाचार्य स्वरूपानन्द को स्वंभू शंकराचार्य बताया ।कहा कि वे न तो ब्रहमानन्द सरस्वती व न ही कृष्ण्बोधाश्रम महारज की पद्धती के अनुयायी या शिष्य हैं इस लिए वे कभी भी शंकराचार्य नही हो सकते हैं। कहा कि जब स्वरूपानन्द स्वंय शंकराचार्य नही हैं तो वे अपना शिष्य कैसे बना सकते हैं। स्वरूपानन्द के शिष्य अविमुक्तेश्वरानन्द जिन्होंने पूजा पद्धती के नाम पर पूर्णागिरी मंदिर जोशीमठ में अंशन किया था पर शंकराचार्य वासुदेवानन्द सरस्वती ने प्रश्नचिन्ह लगाते हुए कहा कि वे निम्न श्रेणी के ब्राहमण हैं इस लिए वे सन्यासी नही बन सकते है।

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